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HIV Risk: हिमाचल में एचआईवी संक्रमण को लेकर अलर्ट, गलती से इस्तेमाल की हुई सिरिंज लग जाए तो क्या करें?

Thu, 13 Aug 2026 10:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एचआईवी संक्रमित रक्त के संपर्क से फैल सकता है। यदि किसी संक्रमित व्यक्ति पर इस्तेमाल की गई सुई दूसरे व्यक्ति की त्वचा के भीतर चली जाए तो वायरस के शरीर में प्रवेश करने का खतरा हो सकता है।
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हिमाचल प्रदेश में एचआईवी के मामले - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) का खतरा दुनियाभर में देखा जा रहा है। हालांकि अब ये बीमारी लाइलाज नहीं रही है, मेडिकल साइंस की प्रगति और अत्याधुनिक दवाओं ने एचआईवी संक्रमण के खतरों को कम करने में मदद की है। एचआईवी, एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) रोग का कारण बनता है।

भारत में भी इस संक्रमण का जोखिम देखा जाता रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में एचआईवी संक्रमण के नए मामलों से जुड़े आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। साल 2025-26 में सामने आए एचआईवी मामलों में 19 फीसदी संक्रमण सिरिंज साझा करने से जुड़ा पाया गया है। साल 2021-22 में ऐसे 363 नए मामले थे, जो 2024-25 में बढ़कर 1000 हो गए।

इससे पहले जून में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने हिमाचल प्रदेश के कई आदिवासी जिलों में एचआईवी और अन्य एसटीडी संक्रमण के मामलों की जानकारी साझा की थी। फिलहाल सिरिंज साझा करने से एचआईवी संक्रमण फैलने को लेकर खतरा देखा जा रहा है।
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एचआईवी संक्रमण का खतरा - फोटो : Adobe Stock
एचआईवी का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एचआईवी कई वजहों से फैल सकता है। असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त चढ़ाने, संक्रमित मां से उसके बच्चे और संक्रमित सुई लगने से भी संक्रमण होने का खतरा रहता है। यदि किसी एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की गई सुई किसी दूसरे व्यक्ति को लगाई जाती है तो वायरस के शरीर में पहुंचने का खतरा हो सकता है। 

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर इस्तेमाल की हुई सिरिंज से एचआईवी संक्रमण नहीं होता। सुई किस व्यक्ति पर इस्तेमाल हुई थी, उस व्यक्ति को एचआईवी था या नहीं और एक्सपोजर कितनी समय पहले हुआ? इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपने पहले से इस्तेमाल की गई सूई लगवा ली है तो भले ही इससे एचआईवी का खतरा कम हो, फिर भी हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे खून से फैलने वाले अन्य संक्रमण का जोखिम हो सकता है। इसलिए हमेशा नई सिरिंज का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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संक्रमित इंजेक्शन से संक्रमण का खतरा - फोटो : Freepik.com
संक्रमित सुई लग जाए तो क्या करें?

सबसे पहले घाव को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। घाव को जोर-जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं है। इसके बाद तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 
 
  • डॉक्टर को बताएं कि सुई कब लगी और यदि पता हो कि सुई पहले किस व्यक्ति को लगी थी तो ऐसी जानकारियां जोखिमों का आकलन करने में मदद करती है।
  • आपके जोखिमों को समझते हुए डॉक्टर एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस- सी की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
 
डॉक्टर आपको पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) दे सकते हैं। ये इमरजेंसी दवाओं का एक सेट है जो एचआईवी को रोकता है। यह तब सबसे अच्छा काम करता है जब इसे शुरुआती कुछ घंटों में लिया जाए। आमतौर पर शुरुआत 24-72 घंटों में इसे डॉक्टर की सलाह पर लेना जरूरी है।
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सिरिंज के इस्तेमाल को लेकर बरतें सावधानियां - फोटो : Freepik.com
इन बातों का भी रखें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सुई या सिरिंज को कभी भी दोबारा इस्तेमाल या साझा नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य संस्थानों में हर मरीज के लिए सुरक्षित और स्टेराइल इंजेक्शन उपकरण का इस्तेमाल होना चाहिए।
 
  • अगर किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर फेंकी हुई सुई दिखाई देती है तो उसे हाथ से उठाना नहीं चाहिए।
  • इंजेक्शन लगाने वाले लोगों के लिए हर बार नई, स्टेराइल सुई और सिरिंज का इस्तेमाल सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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