मासिक धर्म की समस्याएं
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पीरियड्स पर पड़ने वाला असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओपीडी में आने वाली 12-18 साल की उम्र की बालिकाओं, किशोरियों में माहवारी संबंधी परेशानी देखने को मिल रही है। इनमें से करीब दो फीसदी में फास्टफूड-खराब दिनचर्या की वजह से यह दिक्कत मिल रही है।
- महिलाओं में प्रतिदिन कुछ न कुछ फास्टफूड-डिब्बाबंद चीजें खाने की आदत देखी गई।
- कई लड़कियां रोज 4-6 घंटे मोबाइल-लैपटॉप का भी उपयोग करती थी जिससे सोने-जागने का समय बिगड़ गया।
- अधिकांश रात 11 से एक बजे के बीच सोती हैं। लंबे समय तक ऐसी आदतों से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ गया।
- इन्हीं वजहों से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की दिक्कत भी बनी। इससे अंडाणु बनना प्रभावित हो रहा है। इससे 10-12 फीसदी में आगे चलकर बांझपन का भी खतरा रहता है।
- इससे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) की दिक्कत भी बढ़ रही है, इससे अंडाणु बनना प्रभावित हो रहा है। ये आगे चलकर बांझपन का भी खतरा बढ़ा सकता है।
डॉक्टर कहते हैं अगर आपको भी मुंहासे, बाल झड़ने की समस्या, वजन बढ़ने या फिर पीरियड्स की दिक्कतें हो रही हैं तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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