कई अध्ययनों से ये स्पष्ट हो चुका है कि हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर साइलेंट किलर है, यानी ये स्थिति शरीर को अंदर ही अंदर खोखला करती जाती है। कम उम्र वालों में भी ये दिक्कत तेजी से बढ़ती जा रही है। हाई ब्लड प्रेशर को हृदय रोग और हार्ट अटैक का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। हालांकि ब्लड प्रेशर के मामले में चिंता की बात ये रही है कि कई बार व्यक्ति को वर्षों तक कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। बीपी के लक्षण न दिखने की वजह से इसका समय रहते इलाज नहीं हो पाता और बीमारी अंदर ही अंदर आपके दिल, दिमाग, किडनी और आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर कई कारणों से हो सकता है, जिनमें आनुवंशिकता, बढ़ती उम्र, मोटापा, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक नमक का सेवन, धूम्रपान, शराब और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं। भारत समेत पूरी दुनिया में करोड़ों लोग हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लोग या तो अपनी बीमारी से अनजान हैं या फिर इससे जुड़े कई मिथकों पर भरोसा कर लेते हैं।
गलत जानकारी के कारण कई मरीज समय पर जांच नहीं करवाते या डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद कर देते हैं। ये गंभीर खतरे को कारण बन सकती है। आइए बीपी को लेकर फैले ऐसे ही कुछ आम मिथ्स और उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक सच को जान लेते हैं।