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Alert: हाई ब्लड प्रेशर की ये बातें नहीं जानते तो आपके लिए भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें, हो जाएंगी गंभीर बीमारियां

Sat, 27 Jun 2026 06:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर कई कारणों से हो सकता है, जिनमें आनुवंशिकता, बढ़ती उम्र, मोटापा, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक नमक का सेवन, धूम्रपान, शराब और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं। कहीं आप भी तो इस समस्या का शिकार नहीं हैं?
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हाई बीपी की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
कई अध्ययनों से ये स्पष्ट हो चुका है कि हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर साइलेंट किलर है, यानी ये स्थिति शरीर को अंदर ही अंदर खोखला करती जाती है। कम उम्र वालों में भी ये दिक्कत तेजी से बढ़ती जा रही है। हाई ब्लड प्रेशर को हृदय रोग और हार्ट अटैक का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। हालांकि ब्लड प्रेशर के मामले में चिंता की बात ये रही है कि कई बार व्यक्ति को वर्षों तक कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। बीपी के लक्षण न दिखने की वजह से इसका समय रहते इलाज नहीं हो पाता और बीमारी अंदर ही अंदर आपके दिल, दिमाग, किडनी और आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर कई कारणों से हो सकता है, जिनमें आनुवंशिकता, बढ़ती उम्र, मोटापा, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक नमक का सेवन, धूम्रपान, शराब और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं। भारत समेत पूरी दुनिया में करोड़ों लोग हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लोग या तो अपनी बीमारी से अनजान हैं या फिर इससे जुड़े कई मिथकों पर भरोसा कर लेते हैं।

गलत जानकारी के कारण कई मरीज समय पर जांच नहीं करवाते या डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद कर देते हैं। ये गंभीर खतरे को कारण बन सकती है। आइए बीपी को लेकर फैले ऐसे ही कुछ आम मिथ्स और उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक सच को जान लेते हैं।
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ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा - फोटो : Adobe Stock
मिथ: सिर्फ बुजुर्गों को ही होता है हाई ब्लड प्रेशर

हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर बढ़ती उम्र की बीमारी मान लिया जाता है, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं।
 
  • बदलती जीवनशैली, मोटापा, तनाव, जंक फूड्स और शारीरिक निष्क्रियता के कारण कम उम्र के युवाओं में भी हाई बीपी की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
  • 20-30 की आयु में भी युवाओं में हाइपरटेंशन के मामले सामने आ रहे हैं। 
  • यदि आपके परिवार में हाई बीपी की हिस्ट्री रही है, तो आपमे जोखिम और बढ़ जाता है।
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ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Freepik.com
मिथ: शुरुआत में ही लक्षणों से हो सकती है पहचान

हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि अधिकांश लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। 
 
  • कई मरीजों में इसका पता ही तब चल पता चलता है जब नियमित जांच में बीपी बढ़ा हुआ मिलता है।
  • कई लोगों को इसका पता ही तब चल पाता है जब हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी की समस्या जैसी जटिलताएं सामने आती हैं। 
  • हाई ब्लड प्रेशर में सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखना या सांस फूलने जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन इन लक्षणों का न होना सामान्य ब्लड प्रेशर की गारंटी नहीं है।

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दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी - फोटो : Freepik.com
मिथ: बीपी सामान्य हो जाए तो दवा बंद कर देनी चाहिए

ब्लड प्रेशर की दवाएं बीमारी को नियंत्रित करती हैं, उसे पूरी तरह खत्म नहीं करतीं। 
 
  • दवा लेने से बीपी सामान्य रहता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करने पर यह दोबारा बढ़ सकता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। 
  • कुछ मरीजों में जीवनशैली में बड़े बदलाव के बाद डॉक्टर दवा की मात्रा कम कर सकते हैं।
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चिप्स खाने से क्या नुकसान हैं - फोटो : Freepik.com
मिथ: नमक कम खा रहे हैं, तो हाई बीपी नहीं होगा

नमक का अधिक सेवन हाई ब्लड प्रेशर का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है। 
 
  • आनुवंशिकता, मोटापा, तनाव, किडनी की बीमारी, शारीरिक निष्क्रियता और हार्मोन संबंधी समस्याएं भी हाई बीपी का कारण बन सकती हैं। 
  • इसके अलावा कई पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड में छिपा हुआ सोडियम भी काफी मात्रा में होता है। ये चीजें भी बीपी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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