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Arthritis Relief: अर्थराइटिस ने चलना-फिरना कर दिया है मुश्किल? अब बिना घुटने बदलवाए भी पा सकेंगे आराम

Sat, 27 Jun 2026 05:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैज्ञानिकों ने आर्थराइटिस के शिकार लोगों के लिए जिस तकनीक को कारगर बताया है उसे जेनिक्युलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन (जीएई) नाम दिया गया है। ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए ये नई चिकित्सा तकनीक उम्मीद की किरण बनकर उभर रही है।
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अर्थराइटिस की समस्या और इसके खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
जोड़ों-हड्डियों में दर्द-अर्थराइटिस की समस्या को पहले बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। 25 से 40 साल की उम्र के युवा भी अब जोड़ों के दर्द, सूजन और अकड़न की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। लंबे समय तक लैपटॉप पर बैठकर काम करना, घंटों मोबाइल चलाना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, खराब खानपान, विटामिन-डी-कैल्शियम की कमी ने इस बीमारी के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। कहीं आप भी तो हड्डियों की समस्या का शिकार नहीं हैं?

अर्थराइटिस की शुरुआत अक्सर मामूली दर्द से होती है। कई लोग इसे सामान्य थकान या ज्यादा काम करने का असर समझकर पेनकिलर खाते रहते हैं। हालांकि धीरे-धीरे जोड़ों में सूजन बढ़ती जाती है और चलना-फिरना भी मुश्किल होने लगता है। अगर समय रहते सही जांच और इलाज न मिले, तो यह बीमारी जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है और जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

इस तरह की समस्याओं से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर है। विशेषज्ञों ने एक ऐसी तकनीक के बारे में जानकारी दी है जो सूजन पैदा करने वाली रक्त वाहिकाओं को बंद करके जोड़ों की समस्या को कम करने में मददगार हो सकती है।
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अर्थराइटिस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
अर्थराइटिस का खतरा और इसका इलाज

पिछले कुछ वर्षों में अर्थराइटिस के इलाज में कई नई प्रगति हुई हैं। आधुनिक बायोलॉजिक दवाएं, टारगेटेड थेरेपी, एडवांस फिजियोथेरेपी, बेहतर जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक और नई रिसर्च ने उन मरीजों के लिए भी उम्मीद जगाई है, जिन्हें पारंपरिक इलाज से पर्याप्त आराम नहीं मिल रहा था। 
  • विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए और सही समय पर उपचार शुरू किया जाए, तो जोड़ों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है और मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकता है।
  • वैज्ञानिकों ने अर्थराइटिस के शिकार लोगों के लिए जिस तकनीक को कारगर बताया है उसे जेनिक्युलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन (जीएई) नाम दिया गया है।
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अर्थराइटिस का सामने आया नया इलाज - फोटो : Freepik.com
जेनिक्युलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन (जीएई)

घुटनों में ऑस्टियोअर्थराइटिस से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए ये नई चिकित्सा तकनीक उम्मीद की किरण बनकर उभर रही है। 
  • यह तकनीक उन मरीजों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो दवाओं, फिजियोथेरेपी और इंजेक्शन जैसे पारंपरिक उपचारों से पर्याप्त राहत नहीं पा रहे हैं।
  • सामान्य तरीके से राहत न पाने वाले या फिर जो लोग नी रिप्लेसमेंट जैसी बड़ी सर्जरी कराने के लिए भी तैयार नहीं हैं, उनके लिए ये कारगर हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जीएई प्रक्रिया घुटने के अंदर होने वाली सूजन को कम करके दर्द में उल्लेखनीय राहत दे सकती है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत को टाल सकती है।

इसमें कैथेटर के जरिए घुटने की सूजन वाली रक्त वाहिकाओं में छोटे कण (माइक्रो-बीट्स) डालकर रक्त प्रवाह कम किया जाता है, जिससे दर्द और सूजन में तेजी से और लंबे समय तक राहत मिलती है।

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हड्डियों की बीमारी होगी दूर - फोटो : Freepik.com
कई लोगों को मिला इससे आराम

अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो एंशुट्ज स्कूल ऑफ मेडिसिन के चिकित्सकों द्वारा साझा किए गए अनुभव और शोध निष्कर्षों के अनुसार इस तकनीक से कई मरीजों को लंबे समय तक लाभ मिला है।
 
  • 74 वर्षीय सिंथिया श्राफ-फ्लेचर उन मरीजों में शामिल हैं जिन्हें इस प्रक्रिया से उल्लेखनीय लाभ मिला।
  • उनके एक घुटने का पहले प्रत्यारोपण हो चुका था और उस सर्जरी के बाद उन्हें कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ा था। 
  • ऐसे में दूसरे घुटने के लिए उन्होंने जीएई का विकल्प चुना। 
  • करीब एक वर्ष बाद उनका कहना है कि उन्हें मिलने वाली राहत की तुलना घुटना प्रत्यारोपण से की जा सकती है। अब वे बागवानी व साइकिल चलाने जैसी गतिविधियां कर पा रही हैं।
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हड्डियों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
ऐसे मरीजों को होता है सबसे ज्यादा फायदा

इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट और शोधकर्ता डॉ. ली कैसाडाबन के अनुसार, हल्के से मध्यम स्तर के ऑस्टियोअर्थराइटिस वाले मरीजों में सबसे अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। हालांकि गंभीर अवस्था वाले मरीज भी यह प्रक्रिया करा सकते हैं, लेकिन उनमें लाभ की अवधि अपेक्षाकृत कम हो सकती है।

लगभग 70 प्रतिशत मरीजों में बहुत अच्छे परिणाम देखे गए हैं। कई मरीजों के दर्द के स्तर में आधे से भी अधिक कमी आई, जबकि कुछ मामलों में दर्द लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया।



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स्रोत:
Genicular Artery Embolization (GAE)


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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