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Health Alert: रोजमर्रा की इन चीजों में मौजूद 'हिडेन शुगर' धीरे-धीरे बिगाड़ रही है आपकी सेहत, हो जाइए सावधान

Tue, 22 Jul 2025 07:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • जब हम शुगर शब्द सुनते हैं तो सबसे पहले दिमाग में मिठाइयां, केक या कोल्ड ड्रिंक आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि रोजमर्रा की बहुत-सी चीजों में छिपी हुई चीनी (हिडेन शुगर) हो सकती  है, जिसे हम बिना सोचे-समझे खाते रहते हैं।
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हिडेन शुगर और इसके नुकसान - फोटो : Freepik.com
सेहत को ठीक रखना चाहते हैं तो इसका सबसे आसान फॉर्मूला है- खान-पान में सुधार करना। हम दिनभर में जो कुछ भी खाते-पीते रहते हैं उसका शरीर पर सीधा असर होता है, यही कारण कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को ऐसी चीजों से परहेज करने की सलाह देते हैं जिनसे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

जब भी बात गड़बड़ खान-पान की आती है तो सबसे ज्यादा चर्चा तेल और चीनी की होती है। इन दोनों का अधिक सेवन आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। कई अध्ययन इस तरफ चिंता जताते रहे हैं कि चीनी, 'व्हाइट पॉइजन' के समान है जिससे डायबिटीज के साथ कैंसर तक का भी खतरा हो सकता है।

जब हम 'चीनी या शुगर' शब्द सुनते हैं तो सबसे पहले दिमाग में मिठाइयां, केक या कोल्ड ड्रिंक आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि रोजमर्रा की बहुत-सी चीजों में छिपी हुई चीनी (हिडेन शुगर) हो सकती है, जिसे हम बिना सोचे-समझे खाते रहते हैं। यही ‘हिडेन शुगर’ धीरे-धीरे शरीर में कई बीमारियों की वजह बन रही है।
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ज्यादा शुगर वाली चीजें खाने से बचें - फोटो : Freepik.com
सबसे पहले जानिए हिडेन शुगर क्या होती है?

हिडेन शुगर यानी ऐसी चीनी जो खाने में डाली तो जाती है लेकिन वो स्वाद में बहुत मीठी नहीं लगती। इसे अक्सर पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड या ड्रिंक्स में प्रिजर्वेटिव्स और फ्लेवर बढ़ाने के लिए डाला जाता है। कई बार पैकेट पर ‘शुगर फ्री’ लिखा होता है, लेकिन उसमें भी सूक्रोज, फ्रक्टोज, हाई फ्रक्टोज कॉर्न सिरप जैसे नामों से चीनी छिपी होती है।

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप इन चीजों का भी अक्सर सेवन करते रहते हैं तो इसका भी सेहत पर बुरा असर हो सकता है।
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डायबिटीज का जोखिम - फोटो : Freepik.com
हिडेन शुगर और इसका सेहत पर असर

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से ऐडेड शुगर लेते हैं उनमें मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा दो गुना ज्यादा होता है। इसी तरह जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जामा) में प्रकाशित अध्ययन की एक रिपोर्ट बताती है कि अधिक शुगर का सेवन करने वाले लोगों में हृदय रोग और इससे मौत का खतरा बढ़ सकता है।

हिडेन शुगर इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ाकर कुछ खास तरह के कैंसर जैसे कोलन और ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को भी बढ़ा देती है।

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पैक्ड जूस-कोल्ड ड्रिंक्स है नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
मीठे पेय और कोल्ड ड्रिंक्स के शौकीन तो नहीं हैं आप?

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, जो मीठा दिखता है, वो जरूरी नहीं नुकसानदेह हो, पर जो मीठा छिपा है, वही सबसे ज्यादा खतरा बन सकता है। जो लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स (जिनमें सोडा और कुछ जूस शामिल हैं) का अधिक सेवन करते रहते हैं उन्हें भी सावधान हो जाना चाहिए। कोल्ड ड्रिंक्स में चीनी की अधिक मात्रा हो सकती है जिसके कई नुकसान  हैं।
 
  • अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशियन में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कम मात्रा में भी मीठे पेय के सेवन की आदत नुकसानदायक है। एक लाख से ज्यादा लोगों पर किए गए चौंकाने वाले अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं और हफ्ते में सिर्फ दो बार ही मीठे पेय पदार्थ पीते हैं, उनमें हृदय रोगों का खतरा 15 फीसदी तक अधिक होता है।
  • वहीं जिन प्रतिभागियों ने हफ्ते में दो बार मीठे पेय पदार्थ पिए और व्यायाम नहीं किया, उनमें दिल की बीमारी होने का जोखिम 50 फीसदी अधिक देखा गया। 
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खान-पान को रखें ठीक - फोटो : Adobe Stock
फिर हिडेन शुगर से कैसे बचें?

अब सवाल ये है कि कैसे जानें कि आपके खाद्य-पेय पदार्थ में हिडेन शुगर तो नहीं है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है? इसके लिए विशेषज्ञ कहते हैं, सबसे जरूरी है कि कोई भी सामान खरीदते समय उसका लेबल पढ़ें, हर पैकेट वाली चीज में इंग्रेडिएंट्स जरूर चेक करें। चीनी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इसके स्वस्थ विकल्पों का चयन करें। गुड़, शहद, खजूर जैसे प्राकृतिक स्वीटनर का इस्तेमाल करें। 




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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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