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इन कारणों से नवजात शिशुओं में पाया जाता है जन्मजात ह्रदयदोष, ऐसे होते हैं लक्षण

Mon, 22 Mar 2021 01:21 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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1000 जीवित बच्चों में से 9 बच्चे जन्मजात हार्ट दोष के साथ पैदा होते हैं - फोटो : सोशल मीडिया

जन्मजात हार्ट का दोष (सीएचडी) बच्चे के जन्म के दौरान ही उसमें मौजूद हार्ट की एक कंडीशन होती है। भारत में सभी जन्मजात जन्म दोषों में इस बीमारी की हिस्सेदारी एक तिहाई है। भारत में हर साल 1000 जीवित बच्चों में से 9 बच्चे जन्मजात हार्ट दोष के साथ पैदा होते हैं। हर साल इससे प्रभावित बच्चों की संख्या 200,000 से ज्यादा होती है। इन प्रभावित बच्चों में से हर पांचवें बच्चे को एक गंभीर दोष होने की संभावना होती है। बच्चों में जन्मजात हार्ट दोष के लक्षणों में नाखून या होंठों का  नीला हो जाना, बहुत तेज या सांस लेने में कठिनाई, दूध पीते समय थकावट होना और बहुत ज्यादा सोना शामिल होता है। अगली स्लाइड्स से जानिए मिरेकल्स मेडिक्लिनिक और अपोलो क्रेडल हॉस्पिटल, गुरुग्राम और की गायनेकॉलोजिस्ट और ऑब्स्टेट्रिशन डॉ शीला गौड़ द्वारा बताई गई महत्वपूर्ण जानकारी। 










 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
यह बीमारियां होती हैं-
आमतौर पर दिखने वाले सीएचडी में एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट, एट्रीओवेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट और वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट शामिल हैं, जबकि ज्यादा क्रिटिकल वाले बच्चों में एओर्टा का कोअर्क्टेशन, डबल-आउटलेट राइट वेंट्रिकल, ग्रेट आर्टरीज का डी-ट्रांसपोजेशन, एबस्टीन एनोमली, हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट सिंड्रोम, बंद एओर्टिक अर्क, पल्मोनरी अट्रेसिया, सिंगल वेंट्रिकल, फैलोट का टेट्रालॉजी, कुल विसंगति पल्मोमरी वेनस रिटर्न, ट्राइकसिड अट्रेसिया, और ट्रंकस आर्टेरियोसस शामिल होता है।  


 

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बच्चे के हार्ट की संरचना पर स्थायी प्रभाव पड़ता है - फोटो : social media

इन कारणों से हो सकता है जन्मजात ह्रदयदोष 

मां का अवांछित तत्व से संपर्क
जब गर्भ में शिशु के ह्रदय की संरचना होती है, उस समय में किसी अवांछित तत्व के संपर्क में आने से विकास पर बुरा असर पड़ता है और इससे बच्चे के हार्ट की संरचना और इसके काम करने के तरीके पर स्थायी प्रभाव पड़ता है जिसमें दिल में छोटा छेद से लेकर गंभीर संकेत जैसे कि हार्ट के हिस्से का न बना होना या अनुपस्थित होना भी शामिल होता है।

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इसे बहुत खतरनाक माना जाता है - फोटो : amar ujala

मैटरनल डायबिटीज
मैटरनल डायबिटीज बच्चे में जन्मजात हार्ट के दोष होने का सबसे गंभीर कारण होता है। डायबिटीज टाइप 1 और डायबिटीज टाइप 2 से पीड़ित गर्भवती महिला द्वारा बच्चे का जन्म देने पर बच्चे में जन्मजात हार्ट दोष का खतरा उन महिलाओं के मुकाबलें ज्यादा होता है जिन महिलाओं को डायबिटीज नहीं होती है। शरीर में इंसुलिन हार्मोन के बढ़े हुए स्तर के कारण भी भ्रूण का सामान्य विकास बाधित हो सकता है इसलिए इसे बहुत खतरनाक माना जाता है।  

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सीएचडी कंडीशन वाले बच्चे होने की संभावना ज्यादा होती है - फोटो : Pixabay

गर्भावस्था में शराब का सेवन
जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान लगातार और नियमित रूप से शराब का सेवन करती हैं। उनके बच्चे में सीएचडी हो सकता है जिसमें ज्यादातर एट्रिअल या वेंट्रिकुलर सेप्टल दोष होता है। रूबेला या जर्मन खसरा एक अन्य फैक्टर है जो भ्रूण के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। जो महिलाएं पहली तिमाही के अंदर ही फ्लू से ग्रसित होती हैं, उनमें सीएचडी कंडीशन वाले बच्चे होने की संभावना ज्यादा होती है।

 

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भ्रूण के विकास पर दुष्प्रभाव डालते हैं - फोटो : Pixabay
अलग- अलग दवाओं का सेवन 
माताओं द्वारा खाने वाली दवाओं से बच्चे में सीएचडी होने का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था के 30 सप्ताह के बाद इबुप्रोफेन पेन किलर खाने से बच्चे को हार्ट की समस्या होने का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा कुछ एंटी-सीजर्स दवाइयां जैसे कि बेंज़ोडायजेपाइन और मुँहासे वाली दवाएं जैसे कि आइसोट्रेटिनॉइन और टॉपिकल रेटिनोइड्स भी भ्रूण के विकास पर दुष्प्रभाव डालते हैं।
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