‘युवाओं के दम पर बुजुर्गों को बचा सकता है भारत’
डॉक्टर रामानन लक्ष्मीनारायण इस संबंध में कुछ सुझाव भी देते हैं। वे कहते हैं, “ऐसा करने के लिए भारत को अपनी टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाना होगा, ताकि जिन तबकों में हम कोविड-19 को सीमित रखना चाहते हैं, वहाँ तेजी से संक्रमण का पता लगाया जा सके और जिनको स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत हो, उन्हें जल्द से जल्द ये सेवाएं दी जा सकें। साथ ही सोशल डिस्टेन्सिंग और साफ-सफाई का ध्यान तो रखना ही होगा।”
डॉक्टर रामानन एंटी-बॉडीज टेस्टिंग को भी जरूरी मानते हैं ताकि उन लोगों का पता लगाया जा सके जिनमें कोविड-19 से लड़ने वाली एंटीबॉडी विकसित हो चुकी हैं। वे कहते हैं, “मुझे लगता है कि लॉकडाउन ने भारत में कोविड-19 के पीक को एक महीने के लिए टाल दिया है। हमें इस समय का उपयोग यह समझने के लिए करना चाहिए कि हम अपने उद्देश्य तक कैसे पहुँचेंगे।“
“हमें स्वास्थ्य सेवाओं को तेजी से मजबूत करना होगा और साथ ही ये भी समझना होगा कि हम कोविड-19 के डर के साये में पूरा जीवन नहीं बिता सकते। इसलिए अगर लॉकडाउन खुल भी जाता है तो हमें सोशल डिस्टेन्सिंग, मास्क वगैरह का खास ध्यान रखना होगा। हर्ड इम्यूनिटी की बात करें तो अपने युवाओं के बल पर भारत अपने बुजुर्गों को बचा सकता है, पर इम्यूनिटी को हासिल करने में जोखिम क्या-क्या होंगे, ये समय ही बता सकता है।”