प्रतीकात्मक तस्वीर
बीबीसी से बातचीत में डॉ. सरीन ने बताया कि डोनर ना मिलने की वजह से वो प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल शुरू नहीं कर पा रहे हैं। जितने लोग कोविड-19 से ठीक हो कर गए हैं, उनके फोन नंबर और परिवार के सदस्यों के सारे नंबर सरकार के पास उपलब्ध हैं। लेकिन जब उन लोगों से संपर्क साधा जाता है तो वो डोनर बनने से मना कर देते हैं। डॉ. सरीन के मुताबिक एक डोनर को एक से डेढ़ घंटे की काउसिलिंग डॉक्टर दे रहे हैं, इसके बाद भी लोग तैयार नहीं हो रहे हैं। कोई कमजोरी का बहाना बना रहा है, कोई लॉकडाउन का बहाना, कोई घर पर दूसरे लोगों तैयार नहीं है, ये कह कर बच रहे हैं।
डॉ सरीन के मुताबिक इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। चूंकि ये बीमारी नई है और लोगों को इसके बारे में ज्यादा मालूम नहीं है, ये सबसे बड़ी वजह है लोगों के डर की। हालांकि कोविड-19 के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी कोई सटीक तरीका अब तक माना नहीं गया है। देश में केवल कुछ जगहों पर ही इसके इस्तेमाल की सशर्त इजाजत दी गई है, लेकिन वो भी करने में अब अड़चन का सामना करना पड़ रहा है। अकेले दिल्ली में लगभग 431 मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं। डॉ सरीन के मुताबिक इन 431 में से 151 ही ऐसे हैं जिनके 3 हफ्ते हो चुके हैं और वो डोनर बन सकते हैं। केरल सरकार को अभी तक इस मामले में मंजूरी का इंतजार है।