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Health Tips: हरियाणा में अचानक बढ़े पीलिया-हेपेटाइटिस के मरीज, जानें आखिर क्यों होती है ये बीमारी?

Mon, 16 Feb 2026 08:12 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hepatitis C Outbreak in Haryana: हरियाणा के एक गांव में इन दिनों हेपेटाइटिस सी के लगभग 32 मरीजों की इलाज चल रही है। एक गांव से अचानक इतने लोगों का बीमार होना चिंता का विषय है। ऐसे में आइए इस लेख में ये जानते हैं कि हेपेटाइटिस बीमारी क्या और क्यों होती है? 
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हरियाणा में मिले हेपेटाइटिस के मरीज - फोटो : ANI
Hepatitis B Cases in Palwal: हरियाणा के पलवल जिले का छांयसा गांव इस वक्त एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। पीलिया और हेपेटाइटिस संक्रमण के कारण हाल ही में सात लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है, जिसके बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर हैं।  उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्वयं गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और संक्रमण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। 

वर्तमान में गांव में हेपेटाइटिस 'बी' के 12 नए मामले सामने आए हैं, जबकि हेपेटाइटिस 'सी' के 32 मरीजों का पहले से ही इलाज चल रहा है। गांव में अब तक कुल 15 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से चार की पुष्टि हेपेटाइटिस बी के कारण हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग अभियान तेज कर दिया है ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। ऐसे आइए इस लेख में हेपेटाइटिस बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं। हेपेटाइटिस एक ऐसी साइलेंट बीमारी है जो धीरे-धीरे लीवर को फेल कर देती है, इसलिए इसके कारणों और बचाव को समझना बेहद जरूरी हो गया है।

 
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हेपेटाइटिस का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
क्या है हेपेटाइटिस और क्यों है यह जानलेवा?
हेपेटाइटिस मुख्य रूप से लीवर (यकृत) में होने वाली सूजन है, जो वायरस के संक्रमण के कारण होती है। हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' सबसे खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि ये सीधे खून और शरीर के तरल पदार्थों के माध्यम से फैलते हैं। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर का रूप ले सकता है।

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इंजेक्शन देना - फोटो : Adobe Stock
कैसे फैलता है यह संक्रमण?
हेपेटाइटिस बी और सी के फैलने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें दूषित पानी और संक्रमित सुइयों का इस्तेमाल प्रमुख है। अक्सर ग्रामीण इलाकों में एक ही सुई से कई लोगों को इंजेक्शन देना या असुरक्षित टैटू बनवाना भारी पड़ता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के रेजर या टूथब्रश साझा करने और असुरक्षित यौन संबंधों से भी यह वायरस एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाता है।

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खून कूी जांच - फोटो : Freepik.com
क्या हो सकते हैं बचाव के उपाय?
पलवल प्रशासन ने गांव में डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग शुरू कर दी है ताकि छिपे हुए मरीजों की पहचान हो सके। बचाव के लिए सबसे जरूरी है हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण करवाना। साथ ही पीने के पानी को हमेशा उबालकर पिएं और किसी भी तरह के मेडिकल प्रोसीजर के दौरान हमेशा नई और डिस्पोजेबल सुई का ही इस्तेमाल सुनिश्चित करें। पीलिया के शुरुआती लक्षणों जैसे आंखों का पीलापन, गहरे रंग का पेशाब और थकान को कभी नजरअंदाज न करें।
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खून कूी जांच - फोटो : Freepik.com
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है
छांयसा गांव की घटना हमें चेतावनी देती है कि स्वास्थ्य के प्रति जरा सी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। हेपेटाइटिस को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर तब दिखाई देते हैं जब लीवर काफी हद तक खराब हो चुका होता है। इसलिए नियमित जांच कराएं और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। आपकी जागरूकता ही आपके परिवार और समाज को इस गंभीर महामारी से सुरक्षित रख सकती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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