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Heart Disease: हार्ट अटैक के मामलों को लेकर बड़ा खुलासा, क्या प्लास्टिक का उपयोग बढ़ा रहा है खतरा?

Sat, 18 Jul 2026 08:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका था, उनके खून में सूक्ष्म प्लास्टिक कण सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक मिले। हालांकि वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि इससे यह साबित नहीं होता कि प्लास्टिक ही हार्ट अटैक का कारण है।
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हार्ट अटैक की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
अगर आपको लगता है कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण के लिए ही  खतरा है, इससे हमें क्या फर्क पड़ेगा? तो यकीन मानिए आप बड़ा खतरा मोल ले रहे हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि यही प्लास्टिक गंभीर रूप से हमारी सेहत के लिए खतरा बढ़ाता जा रहा है।

सितंबर 2025 में अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि माइक्रोप्लास्टिक फेफड़े-मस्तिष्क और हड्डियां सबके लिए खतरे बढ़ाता जा रहा है। अब इसको लेकर हालिया अध्ययन में सामने आया है कि प्लास्टिक हृदय की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा हो सकता है।

इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों ने हार्ट अटैक का शिकार रहे कई मरीजों की खून में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण पाए हैं। इस रिपोर्ट ने प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और इससे होने वाले खतरो को लेकर अलर्ट किया है।

आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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माइक्रोप्लास्टिक बढ़ा रहा हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Adobe Stock
माइक्रोप्लास्टिक से बढ़ता खतरा

इटली के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक (दिल का दौरा) हो चुका था, उनके खून में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक की मात्रा पाई गई। ये उन लोगों की तुलना में ज्यादा थी, जिन्हें कभी हार्ट अटैक नहीं आया या जिनकी हृदय की धमनियां सामान्य थीं।
 
  • माइक्रोप्लास्टिक ऐसे बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देते। ये प्लास्टिक की बोतलों, पैकेजिंग, सिंथेटिक कपड़ों और रोजमर्रा के कई प्लास्टिक उत्पादों के टूटने से बनते हैं।
  • नैनोप्लास्टिक इससे भी छोटे कण होते हैं, जो शरीर के अंदर तक पहुंच सकते हैं।
  • पहले के भी कई अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक को इंसानी सेहत, डीएनए को नुकसान पहुंचाने से लेकर कैंसर तक का खतरा बढ़ाने वाला पाया गया था।
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खून में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

वैसे तो इस अध्ययन का सैंपल साइज छोटा है। 61 मरीजों पर किए गए अध्ययन में इस बात के सबूत मिले हैं कि पर्यावरण प्रदूषण, विशेषतौर पर पर्यावरण में बढ़ता माइक्रोप्लास्टिक हमारी हृदय संबंधी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
 
यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। 
 
  • जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका था, उनमें से 84% के खून में माइक्रोप्लास्टिक या नैनोप्लास्टिक मिले।
  • क्रॉनिक इस्केमिक हार्ट डिजीज वालों में यह आंकड़ा 40% था। इस रोग के कारण हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, क्योंकि धमनियों में प्लाक जमा होने से वे संकुचित हो जाती हैं।
  • जबकि सामान्य कोरोनरी आर्टरी वाले लोगों में 32% के खून में ये प्लास्टिक कण पाए गए।

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स्मोकिंग के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepil.com
धूम्रपान की आदत और बढ़ा देती है खतरा

अध्ययन में सामने आया कि जिन लोगों को हार्ट अटैक हुआ था, उनके खून में कई प्रकार के प्लास्टिक के सूक्ष्म कण थे। इनमें सबसे ज्यादा पॉलीएथिलीन मिला। यही प्लास्टिक आमतौर पर पैकेजिंग, प्लास्टिक बैग, बोतलों और कई घरेलू सामानों में इस्तेमाल होता है।
 
  • शोधकर्ताओं ने मरीजों में धूम्रपान की आदत और पिछले दो वर्षों में वायु प्रदूषण के संपर्क का भी विश्लेषण किया।
  • इसमें पता चला कि जो लोग लंबे समय तक ज्यादा प्रदूषित हवा में रहे, उनके खून में माइक्रोप्लास्टिक मिलने का खतरा अधिक था।
  • वहीं धूम्रपान करने वालों के खून में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की आशंका छह गुना ज्यादा थी।

इतना ही नहीं, जो लोग धूम्रपान भी करते थे और साथ ही अधिक प्रदूषित वातावरण में रहते थे, उनके सभी मरीजों के खून में प्लास्टिक कण मिले। इसके उलट, जो लोग न तो धूम्रपान करते थे और न ही अधिक प्रदूषण वाले माहौल में रहते थे, उनमें केवल 12.5% लोगों के खून में प्लास्टिक कण पाए गए।
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माइक्रोप्लास्टिक के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock Photo
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर इमानुएले बारबातो कहते हैं रिसर्च ये साबित नहीं करती है कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। लेकिन यह जरूर दिखाती है कि पर्यावरण प्रदूषण, खून में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।

मरीजों के डेटा बताते हैं कि प्लास्टिक के सूक्ष्म कण खून के जरिए शरीर में घूमते रहते हैं और रक्त वाहिकाओं की दीवारों में जमा हो सकते हैं। ये कण ऐसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं।



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स्रोत:
Developmental outcomes in 4-year-old children born in the first COVID-19 lockdown in England: preliminary findings from the Born In COVID Year – Core Lockdown Effects (BICYCLE) study 


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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