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Alert: हार्ट अटैक से ठीक होने के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं होता शरीर, जानिए क्या-क्या हो सकती हैं दिक्कतें?

Sun, 04 Jun 2023 07:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हार्ट अटैक के बाद होने वाली दिक्कतें - फोटो : iStock
हार्ट अटैक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जो हृदय में रक्त के संचार में होने वाली समस्याओं के कारण होता है। कोविड-19 महामारी के बाद से लोगों में हृदय रोगों का जोखिम काफी तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के साथ कोरोना संक्रमण ने लोगों में हृदय रोगों के जोखिमों को काफी बढ़ा दिया है, लिहाजा कम उम्र के लोग भी हार्ट अटैक के शिकार हो रहे हैं।

हार्ट अटैक के बाद समय पर सीपीआर और अन्य उपचार मिल जाएं तो रोगी का जान बचाई जा सकती है। हालांकि जान बचने का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं। हार्ट अटैक के बाद शरीर में कई प्रकार के बदलाव आने लगते हैं जिनपर गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।

आइए जानते हैं कि इस बारे में शोधकर्ताओं को अध्ययनों में क्या पता चला?
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हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे से बचाव के उपाय - फोटो : istock
बढ़ सकती हैं हृदय की कई और दिक्कतें

हार्ट अटैक से ठीक हो गए हैं तो आपको हृदय का और भी ख्याल रखने की आवश्यकता है। अधिकांश मामलों में दिल के दौरे, धमनियों के तत्काल ब्लॉकेज या लंबे समय से जारी रुकावट के परिणामस्वरूप होते हैं। नतीजतन, हार्ट अटैक के बाद भी हृदय की मांसपेशियों को पोषक तत्वों और रक्त की आपूर्ति में दिक्कत होती रह सकती है। इससे अनियमित दिल की धड़कन, हृदय की मांसपेशियों में कमजोरी होने जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
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हार्ट अटैक का ब्रेन पर असर - फोटो : istock
बढ़ने लगती है ब्रेन एजिंग की दिक्कत

एक हालिया शोध से पता चला है कि दिल का दौरा पड़ने के बाद तेजी से मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है जो 6 साल बाद मस्तिष्क की स्थिति के बराबर हो सकती है। जेएएमए न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में विशेष रूप से मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया पर हार्ट अटैक के प्रभावों की जांच की गई थी। उम्र बढ़ने के साथ लोगों की सोचने की क्षमता, याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होने लगती है। हार्ट अटैक के बाद यह जोखिम काफी तेजी से बढ़ जाता है।

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बढ़ सकती हैं मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं को संज्ञानात्मक विकारों से जोड़ा है। हार्ट अटैक के शिकार रहे प्रतिभागियों में अन्य लोगों की तुलना में सोचने-याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में जल्दी कमी आने के जोखिम देखे हैं। पुरुषों की तुलना में हार्ट अटैक की शिकार महिलाओं में यह जोखिम और भी अधिक देखा गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हार्ट अटैक के बाद मस्तिष्क की सेहत पर ध्यान देना भी आवश्यक हो जाता है।
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हार्ट अटैक के दुष्प्रभाव - फोटो : iStock
कम हो सकती है लाइफ एक्सपेक्टेंसी

हार्ट अटैक के बाद चूंकि हृदय के साथ आपकी वाहिकाओं की भी कई दिक्कतें बढ़ जाती है जो आपकी लाइफ एक्सपेक्टेंसी को कम कर सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि हार्ट अटैक के बाद सामान्य लोगों की तुलना में लाइफ एक्सपेक्टेंसी 8-10% तक कम हो सकती है। उदाहरण के लिए, बिना हृदय रोग वाले व्यक्ति की मृत्यु अगर 85 वर्ष की आयु के आसपास होती है तो दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में लाइफ एक्सपेक्टेंसी 10% या 8.5 वर्ष तक कम हो सकती है, हालांकि इसके लिए कई और फैक्टर भूमिका निभाते हैं।


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स्रोत और संदर्भ
Association Between Acute Myocardial Infarction and Cognition

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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