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Heart Attack: क्रिकेट खेलते-खेलते आया हार्ट अटैक, मिनटों में हो गई मौत; आखिर क्या है इन मामलों की वजह?

Sun, 29 Jun 2025 05:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हालिया मामला पंजाब के फिरोजपुर से सामने आया है जहां एक बल्लेबाज क्रिकेट मैच के दौरान छक्का मारने के बाद जमीन पर गिर जाता है, बाद में उसकी मौत हो जाती है।
  • खेलते-खेलते इस तरह हार्ट अटैक क्यों हो रहे हैं, इसके पीछे क्या कारण हैं? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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हार्ट अटैक - फोटो : X/@@TimesAlgebraIND
Heart Attack Viral Video: हृदय रोग, हार्ट अटैक के मामले हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़े हैं। ऑफिस में बैठे-बैठे, काम करते हुए, शादी में डांस करते और बैठकर बात करते-करते हार्ट अटैक से मौत की कई खबरें आपने भी जरूर सुनी-पढ़ी होगीं। 

ऐसा ही एक हालिया मामला पंजाब के फिरोजपुर से सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक बल्लेबाज क्रिकेट मैच के दौरान छक्का मारने के बाद तुरंत जमीन पर बैठ जाता है। उसे बेहोश होते देख, बाकी खिलाड़ी उसकी मदद के लिए दौड़े और सीपीआर देने की कोशिश की। हालांकि तब तक उसकी मौत हो गई थी। पीड़ित की पहचान हरजीत सिंह के रूप में हुई है, वह फिरोजपुर के डीएवी स्कूल ग्राउंड में क्रिकेट मैच खेल रहा था।
 

खेलते-खेलते इस तरह हार्ट अटैक क्यों हो रहे हैं, इसके पीछे क्या कारण हैं? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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हार्ट अटैक और इससे मौत के मामले - फोटो : Adobe stock photos
पहले भी देखे जा चुके हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि ये कोई पहला मामला नहीं है, जब इस तरह से खेल के मैदान पर किसी को हार्ट अटैक आया हो। 
  • जून 2024 में मुंबई में भी ऐसी ही घटना हुई थी, जहां क्रिकेट मैच के दौरान 42 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। हार्ट अटैक के तुरंत बाद पीड़ित को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया था।
  • इसी तरह एक अन्य मामले में बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेटर तमीम इकबाल को भी एक मैच के दौरान हार्ट अटैक हुआ, तुरंत उपचार मिलने के कारण वह फिलहाल ठीक हैं।
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हृदय संबंधित समस्याओं का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
हार्ट अटैक और इसका बढ़ता खतरा

हार्ट अटैक के जोखिम बढ़ने के बारे में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ नरेंद्र एन. सिंह बताते हैं, हॉस्पिटल में आ रहे हार्ट अटैक के मामलों को देखें तो पता चलता है कि इसके लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है। लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी तो इसे बढ़ा ही रही है साथ ही काम के दबाव में लोगों की बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता को भी इसका एक कारण माना जा सकता है।

हार्ट अटैक वैसे तो किसी को भी हो सकता है पर हाल के दिनों में युवाओं में इसके मामले काफी तेजी से बढ़ते देखे जा रहे हैं। आनुवंशिक स्थितियों के अलावा कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं और लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण 40 से कम उम्र के लोग बड़ी संख्या में हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं।  

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सीपीआर से बच सकती है जान - फोटो : freepik.com
तुरंत सीपीआर से बचाई जा सकती है जान

डॉ नरेंद्र कहते हैं हार्ट अटैक की स्थिति में अगर तुरंत सीपीआर देकर रोगी को आपातकालीन चिकित्सा मिल जाए तो इससे जान बचाई जा सकती है।  हालांकि कार्डियक अरेस्ट के 90 फीसदी मामलों में सीपीआर या अन्य उपायों के लिए भी समय नहीं होता है।

हृदय रोगों के मामले में सीपीआर प्रभावी तरीका हो सकता है। इस बारे में सभी लोगों को जानना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण जैसे सीने में दर्द, जकड़न, कंधे-हाथ गर्दन-जबड़े में दर्द हो रहा हो, सीने में जलन या चक्कर आने जैसी दिक्कत हो रही है तो तुरंत सीपीआर दें और आपातकालीन चिकित्सा के लिए पहुंचाएं।
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हृदय की सेहत का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
हृदय स्वास्थ्य को लेकर आप कितने सावधान?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को अपने हार्ट हेल्थ को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। भले ही आपकी उम्र कम है फिर भी आपको हृदय से संबंधित समस्याओं का खतरा हो सकता है।
  • हृदय स्वास्थ्य को लेकर जो सावधानियां सबसे ज्यादा जरूरी हैं उनमें ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और तनाव के स्तर को कंट्रोल रखना है।
  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल सीधे तौर पर हार्ट अटैक और इससे संबंधित समस्याओं का कारण बनती हैं। खान-पान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
  • इसी तरह तनाव की स्थिति ब्लड प्रेशर को बढ़ाने वाली हो सकती है, यही कारण है कि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए स्ट्रेस को कंट्रोल रखना जरूरी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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