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Good Health: खान-पान ठीक तो दूर होंगी कई बीमारियां, पर डाइट को लेकर जरूर जान लीजिए ये बातें

Mon, 06 Apr 2026 08:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वस्थ रहने के लिए यह जानना जरूरी है कि क्या खाना फायदेमंद है और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए।  डाइट सुधारना एक दिन का काम नहीं, बल्कि जीवनशैली में स्थायी बदलाव है जो लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है।
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डाइट में सुधार करना जरूरी - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी, ये दो ऐसे स्थितियां हैं जिन्हें दुनियाभर में फैली क्रॉनिक बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। हम जो कुछ भी खाते हैं, जिस तरह की दिनचर्या का पालन करते हैं इन सभी का हमारी सेहत पर सीधा असर होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने खानपान में सुधार करने की सलाह देते हैं।

तला-भुना, प्रोसेस्ड और शुगर से भरपूर चीजें हम सभी की पहली पसंद होती हैं, पर क्या आप जानते हैं कि यही हमारी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा भी हैं। इस तरह की डाइट मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, फैटी लिवर और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा देती है। 

अध्ययनों में पाया गया है कि अगर हम सभी कम उम्र से ही अपने खान-पान को सुधार लेते हैं तो बस यही एक उपाय आपको कई गंभीर बीमारियों से बचाए रखने में मददगार हो सकती है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या और कब खाना चाहिए?
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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
अच्छी सेहत के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार

अध्ययनों से पता चलता है कि संतुलित और पौष्टिक आहार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। ये सूजन को कम करते हैं, जो कई क्रॉनिक बीमारियों का मुख्य कारण है। 
 
  • डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और बीज शामिल किए जाएं तो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। 
  • इससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहती है, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है और पाचन तंत्र बेहतर काम करता है। 
  • सही खानपान मानसिक स्वास्थ्य पर भी अच्छी डाइट का सकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे तनाव और थकान कम होती है। 
  • नियमित समय पर भोजन करना और पानी पर्याप्त मात्रा में पीना भी उतना ही जरूरी है। 
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जंक-प्रोसेस्ड फूड्स हो सकते हैं बीमारियों का घर - फोटो : Adobe Stock Photos
कैसा होना चाहिए खान-पान?

डॉक्टर कहते हैं, सोफे पर बैठे टीवी देखते हुए ऑफिस में लैपटॉप पर काम करते हुए या बाजार में घूमते हुए कई बार बहुत तेज भूख लग जाती है। ऐसे में आप अक्सर बिस्कुट, नमकीन, चाय-कॉफी या फास्ट फूड ऑर्डर कर देते है। यह सभी चीजें स्वादिष्ट तो  लगती हैं, लेकिन सेहत के लिए हानिकारक साबित होती है, खासकर तब जब आपका पेट खाली होता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इसलिए जरूरी है कि आप कुछ ऐसा खाएं, जो न सिर्फ आपकी भूख को शांत करे बल्कि सेहत को भी फायदा पहुंचाए। 

आहार कैसा होने चाहिए इस बारे में डॉक्टर कहते हैं, मूंग दाल या चने का स्प्राउट्स प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं और लंबे समय तक पेट को भरा हुआ रखते हैं। 
 
  • ऑफिस की भूख को मिटाने के लिए आप अपने साथ भुने हुए मखाने रखें। यह हल्के और लो कैलोरी युक्त होते हैं और आपकी तेज भूख को शांत करते हैं। 
  • आप चाहें तो कोई फल जैसे केला, सेब या पपीता भी खा सकते हैं, क्योंकि यह आपको तुरंत ऊर्जा देते हैं। 
  • कुछ बनाकर खाना हो तो उपमा पोहा या ओट्स बेहतर रहेंगे। इनमें कार्बोहाइड्रेट और फाइबर का संतुलन होता है।
  •  तेज भूख लगने पर पानी जरूरी पीए क्योंकि कभी-कभी प्यास भी भूख का भ्रम पैदा करती है।
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खान-पान ठीक है तो फिर सेहत रहेगा ठीक - फोटो : Freepik.com
डाइट ठीक तो सेहत ठीक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जब भी खाना खाएं तो वह संतुलित भोजन होना चाहिए। इससे शरीर को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन वसा, विटामिन और खनिज आसानी से मिल जाते हैं और हम स्वस्थ तथा ऊर्जावान बने रहते हैं। डाइट में सुधार सिर्फ वजन घटाने के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। 

शरीर को रोजाना ऊर्जा, प्रोटीन, स्वस्थ वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल की संतुलित मात्रा चाहिए। जब आप ज्यादा जंक फूड, मीठे पेय, नमक या ट्रांस फैट वाली चीजें खाते हैं तो शरीर में पोषण की कमी और विषाक्त तत्वों का जमाव होने लगता है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है और हार्मोन असंतुलन हो सकता है।

संतुलित डाइट लेने से शरीर का वजन नियंत्रित रहता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और इम्यून सिस्टम बेहतर काम करता है। आप डाइट में सुधार करके ही कई बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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