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Health Tips: 400+ AQI में कर रहे हैं मॉर्निंग वॉक? दबे पांव घर कर रही हैं शरीर में ये गंभीर बीमारियां

Sat, 15 Nov 2025 06:42 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

High AQI Health Impact: दिल्ली में वायु प्रदूषण इन दिनों अपने चरम पर है, इस प्रदूषण में भी बहुत से लोग सुबह के समय मॉर्निंग वॉक या वर्कआउट करते हैं। बता दें कि इसका उनके सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है, और कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। आइए जानते हैं। 
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वायु प्रदूषण - फोटो : Amar Ujala
Morning Walk Pollution Risk: भारत के कई प्रमुख शहरों, खासकर दिल्ली-एनसीआर में, सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक अक्सर 400+ के 'गंभीर' या 'खतरनाक' स्तर को पार कर जाता है। इसके बावजूद भी कई स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अपनी मॉर्निंग वॉक की आदत को जारी रखते हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक 400+ AQI वाली हवा में व्यायाम करना, सेहत बनाने के बजाय, शरीर में जहर घोलने जैसा है। इस हवा में मौजूद अल्ट्रा-फाइन पार्टिकल्स (जो 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे होते हैं) और अन्य विषैली गैसें, गहरी सांस लेने के साथ सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर जाती हैं।

शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस लेने की दर और गहराई बढ़ जाती है, जिससे फेफड़ों तक पहुंचने वाले प्रदूषकों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। ये सूक्ष्म कण फेफड़ों की परतों को नुकसान पहुंचाते हैं, ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश करते हैं और दबे पांव कई गंभीर बीमारियों को शरीर में घर करने का न्योता देते हैं। यह आदत न केवल श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है, बल्कि हृदय और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरे में डालती है।
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फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock
फेफड़ों पर इसका असर
400+ एक्यूआई में मॉर्निंग वॉक करने से फेफड़ों पर सबसे पहले और सबसे बुरा असर पड़ता है। PM2.5 कण फेफड़ों के वायुकोषों को ब्लॉक कर सकते हैं और उनमें सूजन पैदा कर सकते हैं। यह क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), ब्रोंकाइटिस, और अस्थमा जैसी मौजूदा श्वसन समस्याओं को तुरंत ट्रिगर कर सकती है। इसके साथ ही देर तक इस जहरीले वातावरण में रहने से फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
हृदय रोग का बढ़ता जोखिम
प्रदूषण के कण जब ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश करते हैं, तो वे रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर देते हैं जिससे खून के थक्के बनने का जोखिम बढ़ जाता है। इससे आपके हार्ट पर दबाव बढ़ता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हाई एक्यूआई में बाहर निकलना हृदय रोगियों के लिए अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है।

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ब्रेन - फोटो : Freepik.com
मस्तिष्क स्वास्थ्य और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
हाल के शोध बताते हैं कि प्रदूषित हवा के अति सूक्ष्म कण रक्त-मस्तिष्क बाधा को पार करके सीधे मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं। यह न्यूरो-इंफ्लेमेशन पैदा करता है, जिससे संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित होती है और लंबी अवधि में डिमेंशिया या पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
इम्यूनिटी का कमजोर होना
लगातार अधिक एक्यूआई वाले प्रदूषण के संपर्क में रहने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। जब फेफड़े प्रदूषकों से लड़ने में व्यस्त रहते हैं, तो शरीर की संक्रमणों से लड़ने की क्षमता घट जाती है। इससे सामान्य फ्लू, वायरल संक्रमण और यहां तक कि गंभीर श्वसन संक्रमणों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है। इसलिए जब तक वायु प्रदूषण अधिक है, तब तक बाहर का वर्कआउट करने से परहेज करें और घर के अंदर योग करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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