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Health Tips: अपशगुन नहीं! शरीर में इन चीजों की कमी से फड़कती हैं आंखें, जानें इसके पीछे का विज्ञान

Tue, 14 Oct 2025 09:10 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Eye Twitching: आंखों का फड़कना एक आम समस्या है, जिससे अधिकतर लोग कभी न कभी जरूर दो चार होते हैं। बहुत से लोग इसे अपशगुन मानते हैं, लेकिन ऐसा होना हमारे शरीर में किसी पोषक तत्व के कमी का संकेत हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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आंखों का फड़कना - फोटो : Amar Ujala
Eye Twitching Reason: अक्सर ऐसा होता है कि जब हमारी आंखें फड़कती हैं तो कुछ लोग इसे शगुन या अपशगुन से जोड़कर देखते हैं। यह एक ऐसा अंधविश्वास है जो भारतीय संस्कृति में सदियों से चला आ रहा है। लेकिन विज्ञान के अनुसार आंखों का फड़कना कोई दैवीय संकेत नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर चल रही किसी समस्या का एक सीधा लक्षण हो सकता है। 

चिकित्सा विज्ञान में इसे 'मायोकिमिया' कहा जाता है, इसमें पलकों की मांसपेशियों में बार-बार और अनियंत्रित रूप से सिकुड़न होता है। यह सामान्य तौर पर थोड़े समय के लिए होता है, लेकिन कुछ लोगों में ये लगातार हो सकता है, और ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आंखों के फड़कने का सबसे बड़ा कारण तनाव और नींद की कमी है, लेकिन इसके अलावा यह शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी का भी संकेत हो सकता है। यह शरीर का एक 'अलार्म सिस्टम' है, जो हमें बता रहा है कि हमारे लाइफस्टाइल या डाइट में कुछ गड़बड़ है। इन संकेतों को समझना और उनका सही इलाज करना बहुत जरूरी है, इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आंखों का फड़कना - फोटो : Freepik
मैग्नीशियम की कमी
आंखों के फड़कने का एक सबसे बड़ा कारण शरीर में मैग्नीशियम की कमी है। मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण खनिज है जो हमारी मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के सही काम के लिए जरूरी है। जब शरीर में मैग्नीशियम का स्तर कम होता है, तो मांसपेशियां और तंत्रिका कोशिकाएं अति-सक्रिय हो जाती हैं, जिससे आंखों की पलकें फड़कने लगती हैं।

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आंखों का फड़कना - फोटो : Freepik
पोटैशियम की कमी
मैग्नीशियम की तरह ही पोटैशियम भी एक आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट है जो मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका संकेतों को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर में पोटैशियम की कमी से भी मांसपेशियों में अनियंत्रित ऐंठन हो सकती है, जिसका असर आंखों की पलकों पर भी दिख सकता है।

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आंखों का फड़कना - फोटो : Freepik
विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 हमारे तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन और आंखों के फड़कने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह कमी अक्सर शाकाहारी लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है।


 
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आंखों का फड़कना - फोटो : Freepik
तनाव और नींद की कमी
अगर आपकी आंखें बिना किसी पोषक तत्व की कमी के फड़क रही हैं, तो इसका सबसे बड़ा कारण लगातार तनाव और पर्याप्त नींद की कमी हो सकता है। तनाव और थकान से शरीर में कोर्टिसोल का लेवल बढ़ता है, जिससे तंत्रिका तंत्र उत्तेजित हो जाता है और आंखों की मांसपेशियां ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं।
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आंखों का फड़कना - फोटो : Freepik
लंबे समय तक स्क्रीन देखना भी समस्या
लंबे समय तक स्क्रीन के सामने काम करने से भी आंखों के फड़कने की समस्या हो सकती है। जब हम कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल पर लगातार देखते रहते हैं, तो आंखों पर तनाव बढ़ता है। इससे आंखें थक जाती हैं और पलकों की मांसपेशियां अनैच्छिक रूप से सिकुड़ने लगती हैं। ऐसे में आप हर 20 मिनट बाद, 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर रखी किसी चीज को देखें। इससे आंखों को आराम मिलता है। इसके अलावा स्क्रीन की ब्राइटनेस को एडजस्ट करें और अपनी आंखों को बार-बार झपकाते रहें ताकि वे नम रहें।

स्रोत और संदर्भ
Eyelid Twitching


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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