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Health Tips: काम को अंत तक खींचने की है आदत? जानें क्यों लोगों में बढ़ती जा रही है प्रोक्रेस्टिनेशन की समस्या

Tue, 14 Oct 2025 08:45 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How to Avoid Digital Distractions: काम टालना एक आम आदत है, जिससे बहुत से परेशान रहते हैं। अक्सर लोग काम करने के बारे में सोचते तो हैं लेकिन कर नहीं पाते हैं, इतना ही नहीं किसी काम को अगर करते हैं भी हैं तो अंत तक खींचते हैं। आइए इसी के बारे में जानते हैं।
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टालमटोल - फोटो : Adobe Stock
How to Break the Habit of Procrastination: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो काम को अंतिम समय तक टालते रहते हैं? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। काम को टालने की इस आदत को प्रोक्रेस्टिनेशन कहा जाता है, और यह आजकल एक आम समस्या बन गई है, जिसने हमारी उत्पादकता और मानसिक सेहत दोनों पर नकारात्मक असर डाला है।

यह सिर्फ आलस नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं, जैसे अपूर्णता का भय, तनाव का प्रबंधन न कर पाना, या काम को बहुत मुश्किल समझना। सोशल मीडिया और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन ने इस समस्या को और भी बढ़ा दिया है, जहां लोग जरूरी काम को छोड़कर तुरंत मिलने वाले 'डोपामिन हिट' के लिए रील या वीडियो देखने लगते हैं। इस आदत के कारण काम का बोझ बढ़ता जाता है, जिससे अंत में बहुत ज्यादा तनाव और चिंता पैदा होती है।

यह एक ऐसा खराब साइकिल है जो न केवल आपकी व्यक्तिगत और पेशेवर जिदगी को प्रभावित करता है, बल्कि आपकी सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। प्रोक्रेस्टिनेशन की समस्या पर ध्यान देना और इसे समझना जरूरी है, क्योंकि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की सफलता के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है।
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टालमटोल - फोटो : Adobe Stock
परफेक्शन और डर का जाल
प्रोक्रेस्टिनेशन का एक बड़ा कारण परफेक्शन का डर है। बहुत से लोग काम को तब तक शुरू नहीं करते जब तक वे उसे पूरी तरह से सही करने के लिए तैयार न हों। यह डर उन्हें काम शुरू करने से ही रोक देता है। वे सोचते हैं कि अगर वे परफेक्ट नहीं कर पाए, तो वे असफल हो जाएंगे, जिससे काम टल जाता है।

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टालमटोल - फोटो : Adobe Stock
थकान और ऊर्जा की कमी
आज की लाइफस्टाइल में लगातार काम और तनाव के कारण लोग मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाते हैं। इस थकान के कारण, दिमाग ऐसे कामों से बचना चाहता है जिनमें ज्यादा ऊर्जा या प्रयास की जरूरत होती है। इस वजह से वह उन कामों को टाल देता है, जिससे थकान का चक्र और भी मजबूत होता जाता है।

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Mobile Use - फोटो : Adobe stock
डिजिटल डिस्ट्रैक्शन का बढ़ता प्रभाव
स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने हमारे दिमाग को इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन (तुरंत संतुष्टि) की आदत डाल दी है। जब हमें कोई मुश्किल काम करना होता है, तो दिमाग उसे टालकर सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग या वीडियो देखने जैसे आसान और तुरंत खुशी देने वाले काम में लग जाता है, जिससे प्रोक्रेस्टिनेशन की समस्या बढ़ जाती है।
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टालमटोल - फोटो : Adobe Stock
सेल्फ-रेगुलेशन और आदत को बदलना
प्रोक्रेस्टिनेशन से लड़ने के लिए आपको अपने दिमाग को छोटे-छोटे काम करने की आदत डालनी होगी। बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांट लें और एक बार में एक ही हिस्से पर ध्यान दें। पोमोडोरो टेक्नीक (25 मिनट काम, 5 मिनट ब्रेक) जैसी तकनीकें इसमें बहुत कारगर साबित होती हैं।

स्रोत और संदर्भ
Why We Procrastinate

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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