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Health Alert: बार-बार हो रहा है सर्दी-जुकाम? जिसे वायरल फीवर समझते हैं आप कहीं वो हे फीवर तो नहीं

Fri, 15 May 2026 09:21 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हे फीवर और सामान्य सर्दी-जुकाम में अंतर समझना जरूरी है। सर्दी-जुकाम आमतौर पर वायरस के कारण होती है और कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, जबकि हे फीवर लंबे समय तक बना रह सकता है और एलर्जी कारकों के संपर्क में आते ही दोबारा शुरू हो सकता है।
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सर्दी-जुकाम की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप भी मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं? सर्दी-खांसी, छींक आना शुरू हो जाता है? अगर हां तो सावधान हो जाइए, ये कमजोर इम्युनिटी का संकेत हो सकता है। अक्सर लोग इन समस्याओं को सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल फीवर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई मामलों में ये हे फीवर का संकेत भी हो सकता है। हे फीवर को एलर्जिक राइनाइटिस भी कहा जाता है।  

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हे फीवर एक एलर्जिक प्रतिक्रिया है जिसके कारण सर्दी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये किसी वायरस नहीं बल्कि पराग, धूल के कण या फफूंद के कारण होता है। दुनियाभर में करोड़ों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। बदलते मौसम, प्रदूषण या फिर एलर्जी के दिनों में इसके मामले काफी बढ़ जाते हैं।

कहीं आप भी हे फीवर का शिकार तो नहीं हो गए हैं?
 
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हे फीवर के बारे में जान लीजिए - फोटो : Adobe Stock
पहले जान लीजिए हे फीवर होता क्या है?

हे फीवर एलर्जी वाली चीजों के कारण होने वाली शारीरिक प्रतिक्रिया है। 
 
  • शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जब किसी सामान्य पदार्थ को हानिकारक मानकर उसके खिलाफ प्रतिक्रिया देने लगती है तो ये समस्या होती है। 
  • आमतौर पर धूल, फफूंदी या जानवरों के बाल के कारण समस्या ट्रिगर हो सकती हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हे फीवर को लोग अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं।  पर ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं।
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हे फीवर के क्या लक्षण हैं? - फोटो : Freepik.com
हे फीवर की पहचान क्या है?

हे फीवर में बार-बार छींक आने, नाक बहने या बंद होने, आंखों में खुजली और पानी आने जैसी समस्याएं देखी जाती हैं। कई लोगों को गले में खराश, कानों में दबाव और सिरदर्द जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। आमतौर पर ये दिक्कतें सामान्य वायरल फीवर में भी होती हैं। जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है, उनमें हे फीवर सांस फूलने और खांसी की परेशानी को बढ़ा सकता है।
 
  • नाक बहना और नाक का बंद होना, जिसे कंजेशन कहते हैं।
  • आंखों से पानी आना, आंखों में खुजली होना या लाल होना।
  • नाक, मुंह या गले में खुजली होना।
  • आंखों के नीचे की त्वचा में सूजना की समस्या। 
  • बहुत ज्यादादा थकावट और कमजोरी महसूस होना।

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सर्दी-जुकाम की समस्या - फोटो : Freepik.com
फिर सर्दी-जुकाम और हे फीवर में अंतर क्या है?

डॉक्टर बताते हैं, सर्दी-जुकाम की समस्या आमतौर पर वायरस के कारण होती है और कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, वहीं हे फीवर लंबे समय तक बना रह सकता है और एलर्जी वाली चीजों के संपर्क में आते ही दोबारा शुरू हो सकता है। 
 
  • हे फीवर में आमतौर पर नाक बहने या पानी आने जैसी समस्या होती है पर बुखार नहीं आता। ये दिक्कत जब तक आप एलर्जी वाली चीजों संपर्क में रहते हैं तब तक बनी रहती है।
  • वहीं सामान्य वायरस फीवर में नाक बहने के साथ शरीर में दर्द और हल्का बुखार भी रहता है। वायरल संक्रमण आमतौर पर 3 से 7 दिन ठीक भी हो जाता है।
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सर्दी-खांसी वाली समस्या- हे फीवर - फोटो : Freepik.com
हे फीवर से बचाव कैसे करें?

डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो हे फीवर से बचने का कोई तरीका नहीं है। अगर आपको हे फीवर है, तो सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उन एलर्जी पैदा करने वाली चीजों के संपर्क में कम से कम आएं, जिनसे लक्षण उभरते हैं।
 
  • अगर आपको परागकणों से एलर्जी से एलर्जी है तो मौसम बदलने के दौरान बाहर कम निकलनें। खिड़कियां बंद रखनें और बाहर से आने के बाद चेहरा व हाथों को अच्छे से धोएं।
  • घर की नियमित सफाई और धूल कम करना बहुतजरूरी है।

हे फीवर के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं देते हैं, जो छींक और खुजली जैसे लक्षणों को नियंत्रित करती हैं। अगर एलर्जी के कारण सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न या  साइनस इंफेक्शन जैसी समस्याएं हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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