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Happy Hormones: सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडोर्फिन तीनों हैं हैप्पी हार्मोन, जानिए इनके काम और क्या है अंतर

Tue, 02 Jun 2026 07:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इन हैप्पी हार्मोन्स पर ध्यान देते रहना काफी जरूरी हो जाता है। आइए सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडोर्फिन के बारे में जान लेते हैं।
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हैप्पी हार्मोन्स क्या हैं? - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही दिन में कभी आप बेहद खुश, उत्साहित, कभी शांत और कभी उदास क्यों महसूस करते हैं? जवाब हो सकता है कि ये उस समय की परिस्थिति के आधार पर हो सकता है। पर मेडिकल साइंस इसे बाहरी नहीं बल्कि शरीर के भीतर की स्थिति मानता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी खुशियों का बड़ा हिस्सा बाहरी चीजों से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर बनने वाले कुछ खास रसायनों से तय होता है। इन्हें हैप्पी हार्मोन्स कहा जाता है।

सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडोर्फिन ये तीन सबसे प्रमुख हैप्पी हार्मोन हैं। यही तय करते हैं कि हमें कब खुशी महसूस होगी, कब मोटिवेशन मिलेगा और कब आप उत्साहित होंगे। इसी के विपरीत कोर्टिसोल हार्मोन शरीर को फाइट मोड में ले आता है। 

अब सवाल ये है कि सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडोर्फिन जब तीनों ही हैप्पी हार्मोन हैं तो फिर इनमें क्या अंतर है? इनका काम क्या-क्या है और कौन हमारे लिए सबसे जरूरी हैं?
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हैप्पीनेस बढ़ाने के तरीके - फोटो : adobe stock
इन तीनों हार्मोन्स को समझिए

हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडोर्फिन तीनों भले ही हैप्पी हार्मोन हैं पर इनके अलग-अलग काम हैं।
 
  • सेरोटोनिन को मानसिक शांति और संतुलन का हार्मोन माना जाता है। यह आपको भीतर से संतुष्ट और स्थिर महसूस कराता है। 
  • डोपामाइन आपके दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम है, जो लक्ष्य हासिल करने पर खुशी और मोटिवेशन देता है। 
  • वहीं एंडोर्फिन शरीर का प्राकृतिक दर्द निवारक है, जो हंसी, व्यायाम और रोमांचक गतिविधियों के दौरान रिलीज होकर आपको अच्छा महसूस कराता है।
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सेरोटोनिन हार्मोन देता है खुशी - फोटो : Freepik.com
पहले सेरोटोनिन के बारे में जानिए 

सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क और आंतों में पाया जाता है। आपके शरीर में लगभग 90 से 95% सेरोटोनिन गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में बनता है। 
 
  • यह मूड, भावनात्मक स्थिरता, नींद, भूख और पाचन जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • धूप में रहने, मेडिटेशन करना, मालिश करवाने और संतुलित आहार लेने से ये हार्मोन बढ़ता है।
  • जब शरीर में सेरोटोनिन का स्तर संतुलित रहता है तो व्यक्ति शांत, संतुष्ट और मानसिक रूप से स्थिर महसूस करता है। 
  • इसका स्तर कम होने पर स्ट्रेस, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और नींद की समस्याएं हो सकती हैं।

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फील-गुड हार्मोन का प्रभाव - फोटो : Freepik.com
डोपामाइन क्या है?

डोपामाइन को फील-गुड या रिवॉर्ड न्यूरोट्रांसमीटर कहा जाता है। यह मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो मोटिवेशन, आनंद, सीखने की क्षमता तथा लक्ष्य प्राप्ति से जुड़ा होता है।
 
  • जब आप कोई उपलब्धि हासिल करते हैं, पसंदीदा भोजन खाते हैं या कोई नया अनुभव प्राप्त करते हैं, तब डोपामाइन रिलीज होता है। 
  • यही कारण है कि डोपामाइन व्यक्ति को दोबारा वही काम करने के लिए प्रेरित करता है। यह व्यवहार और आदतों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • डोपामाइन केवल खुशी से ही नहीं बल्कि फोकस, ध्यान, स्मृति और निर्णय लेने की क्षमता से भी जुड़ा हुआ है। 
  • डोपामाइन की कमी पार्किंसन रोग, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) और कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
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एंडोर्फिन हार्मोन के क्या काम हैं? - फोटो : Freepik.com
एंडोर्फिन क्या करता है?

एंडोर्फिन को नेचुरल पेनकिलर कहा जाता है। ये दर्द कम करने और आपको सुखद अनुभूति पैदा करने में मदद करते हैं।
 
  • जब आप दौड़ते हैं, व्यायाम करते हैं, हंसते या कोई रोमांचक गतिविधि करते हैं तब एंडोर्फिन रिलीज होता है। यही कारण है कि लंबी दौड़ के बाद व्यक्ति काफी अच्छा महसूस करता है।
  • एंडोर्फिन, स्ट्रेस हार्मोन के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं और दर्द सहने की क्षमता बढ़ाते हैं। 
  • हंसने, डांसिंग, पसंदीदा संगीत सुनने से इसका स्तर बढ़ता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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