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Insulin Resistance: इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे ठीक करें? डायटीशियन ने बताए इसके सबसे असरदार तरीके

Tue, 02 Jun 2026 07:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंसुलिन रेजिस्टेंस केवल ब्लड शुगर की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे मेटाबॉलिक सिस्टम को प्रभावित करने वाली स्थिति है। आइए जान लेते हैं कि इससे क्या दिक्कतें होती हैं और  इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे सुधारा जा सकता है? 
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इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही है, भारत भी इससे काफी प्रभावित है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में ये एक 'साइलेंट एपिडेमिक' की तरह बढ़ती जा रही है। अनुमानित तौर पर भारत में हर 4 में से 1 वयस्क इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं। इससे भोजन से प्राप्त ग्लूकोज ऊर्जा में बदलने के बजाय खून में ही बढ़ने लगता है। ब्लड शुगर का स्तर हाई होने के कारण डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल-खानपान की आदतें गड़बड़ होती जा रही हैं, बैठकर काम करना बढ़ गया है वहीं शारीरिक गतिविधियां कम होती जा रही हैं, इन सभी का असर सीधे तौर पर सेहत पर पड़ता है। ये इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ा देती है। अच्छी बात ये है कि खान-पान और लाइफस्टाइल में अगर सुधार कर लिया जाए तो इसके खतरों को काफी कम किया जा सकता है।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या - फोटो : Freepik.com
इंसुलिन रेजिस्टेंस और इसके कारण होने वाली समस्याएं
  
इंसुलिन रेजिस्टेंस को आमतौर पर हम केवल ब्लड शुगर की समस्या मानते रहते हैं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमारे पूरे मेटाबॉलिक सिस्टम को प्रभावित करने वाली स्थिति हो सकती है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार लोगों को लगातार थकान, पेट की चर्बी बढ़ने, मीठा खाने की ज्यादा इच्छा होना और वजन से संबंधित समस्याएं होने लगती हैं। 

डायटीशियन नमृता सिंह कहती हैं, सही खानपान, नियमित व्यायाम, बेहतर नींद और वजन को कंट्रोल करने जैसे उपाय इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि ऐसे लोगों को क्या उपाय करते रहना चाहिए?
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हरी सब्जियां खाने के फायदे - फोटो : freepik.com
हरे पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं

पत्तेदार हरी सब्जियां इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करने में अत्यधिक प्रभावी मानी जाती हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट कम होता है, जबकि ये फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर होती हैं, जो इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं।
 
  • पालक मैग्नीशियम से भरपूर होता है जो ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करता है और इंसुलिन सिग्नलिंग को बेहतर बनाता है।
  • इसी तरह मेथी के पत्तों में घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो शुगर के अवशोषण की गति को काफी धीमा कर देता है।

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फाइबर वाली चीजें खाने से क्या होता है? - फोटो : Adobe Stock
फाइबर और प्रोटीन वाली युक्त चीजें ज्यादा खाएं

घुलनशील फाइबर ब्लड शुगर के अवशोषण को धीमा करता है और इंसुलिन की जरूरतों को कम कर सकता है। ओट्स, दालें, बीन्स, चिया सीड्स, फल और सब्जियां इसके अच्छे स्रोत हैं।
 
  • इसके अलावा फाइबर वाली चीजें पेट को लंबे समय तक भरा रखने में भी सहायक हैं, जिससे ओवरईटिंग कम होती है और वजन को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।
  • इसी तरह प्रोटीन वाली चीजें भूख को नियंत्रित करने और मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं। स्वस्थ मांसपेशियां ग्लूकोज के बेहतर उपयोग में सहायक मानी जाती हैं।
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खान-पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम खाएं

व्हाइट ब्रेड, मैदा, मीठे पेय और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ जैसी रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाती हैं। इससे इंसुलिन का स्तर भी तेजी से बढ़ सकता है। इनकी जगह साबुत अनाज, ब्राउन राइस, जौ, बाजरा और ओट्स जैसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
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इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या - फोटो : Freepik.com
इन बातों का भी रखें ध्यान

अध्ययनों के अनुसार शरीर के वजन का केवल 5-10% कम करना भी इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार ला सकता है। वजन घटाने से सूजन कम होती है, हार्मोनल संतुलन बेहतर होता है और कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनने लगती हैं।
 
  • व्यायाम इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम, तेज चलने या तैराकी करें।
  • नींद की कमी इंसुलिन सेंसिटिविटी को कम कर सकती है। वयस्कों के लिए रोजाना7-9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के लिए स्ट्रेल कम लें। लंबे समय तक रहने वाला तनाव कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ाता है, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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