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लॉकडाउन फिटनेस: कोरोना संकट के बीच रहना है खुश, छोटी छोटी बातों में यूं तलाशें जीवन का आनंद

Sat, 02 May 2020 01:11 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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कोरोना वायरस की महामारी ने पूरी दुनिया को अवसाद में डाल दिया है। लोगों की मौत की खबरें, लॉकडाउन, तेजी से फैलता संक्रमण, मास्क पहने लोगों की तस्वीरें। सब मिलाकर एक भयावाह मंजर पेश कर रहे हैं। ये महामारी, लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए एक बड़ी चुनौती लेकर आई है।

ऐसे तनाव भरे और डिप्रेशन देने वाले हालात में खुद को जहनी तौर पर सेहतमंद बनाए रखना जरूरी है। दुनिया भर के मनोचिकित्सकों से बात करके हमने आपके लिए कुछ टिप्स तैयार किए हैं, जो इस मुश्किल दौर में आप को खुश रखने में मदद कर सकते हैं।
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अपना ध्यान बंटाएं
जो मुद्दा आप को तनाव देता है, उस पर बार-बार गौर करना आसान है। लेकिन, इसी विषय पर लगातार मंथन करने से भला नहीं होने वाला। अपना ध्यान बंटाने के लिए कुछ और कीजिए। इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में काफी मदद मिलती है। हालांकि ध्यान लगाना सबके लिए कारगर नुस्खा नहीं है। ऐसे तनाव भरे माहौल में अक्सर लोग ध्यान या मेडिटेशन करने लगते हैं।

लेकिन, कई लोगों के लिए ध्यान लगाना असरदार नहीं साबित होता। अगर आप दिमाग को स्थिर करेंगे, तो शायद आप फिर उसी मुद्दे पर मंथन करने लगें, जो बात आपको परेशान कर रही थी। अपना जहन साफ करने के चक्कर में तनाव देने वाले विषय से ध्यान हटाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि अब तक के अध्ययन ये बताते हैं कि मेडिटेशन, सबके लिए मददगार नहीं होता। ऐसे लोगों का ध्यान बंटाने का, ध्यान करने से अलग कोई अन्य नुस्खा चाहिए होता है।
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Happiness - फोटो : pexels.com
हालात के बारे में नए सिरे से सोचें
हम अपने जज्बात को कैसे महसूस करते हैं, वो इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस दिशा में सोच रहे हैं। डेरेन ब्राउन अपनी किताब 'हैप्पी' में लिखते हैं, "अगर कोई खिलाड़ी ये सोचते हुए खेल के मैदान में उतरता है कि उसे जीतना ही है, तो हार को पचा पाने में मुश्किल होती है। ऐसे खिलाड़ियों को गहरा सदमा लगता है।"

तो, हर हाल में अपनी जीत देखने के बजाय ये सोचें कि आप अपनी ओर से पूरी कोशिश करेंगे। ऐसे में नतीजा आपने मुताबिक न भी आए, तो उसे स्वीकार कर पाना आसान होता है। अगर ये सोचेंगे कि आप बीमार नहीं पड़ेंगे, तो मुश्किल होगी। तो, ये सोचिए कि आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे। अपनी साफ-सफाई का ध्यान रखेंगे। लॉकडाउन के दौरान घर में रहेंगे। तो, हालात आपके मुफीद होंगे। आप जिन चीजों को नियंत्रित नहीं कर सकते, उन्हें लेकर अपने ऊपर बोझ न डालें।

हमेशा खुश रहने का ख्याल जिंदगी हमारे लिए बोझिल बना देगा। जब हम सिर्फ अपनी खुशी के बारे में ही सोचते हैं, तो हम अपने आस-पास के लोगों की खुशी के बारे में नहीं सोच पाते। इस वजह से आप दूसरों से कट सकते हैं। हर वक्त खुशी तलाशने की सनक में आप अलग थलग पड़ जाते हैं। और खुशी के साझा लम्हे आपके हाथ से निकल जाते हैं।
 

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happiness
छोटी-छोटी बातों को तवज्जो दें
अपनी किताब टेन मिनट्स टू हैपीनेस में सैंडी मन लिखती हैं कि हर इंसान को अपनी जिंदगी के छोटे बड़े तजुर्बात डायरी की शक्ल में दर्ज करने चाहिए। वो सुझाव देती हैं कि इन छह सवालों का जवाब खोजते हुए हर इंसान अपनी खुशी तलाश सकता है-
  • किन छोटी छोटी बातों से आपको आनंद मिला?
  • आपको अपने काम के लिए कैसी तारीफ या प्रतिक्रिया मिली?
  • अच्छी किस्मत के कौन से लम्हे आपके जीवन में आए?
  • आपकी छोटी बड़ी उपलब्धियां क्या रहीं?
  • किन बातों ने आपको शुक्रगुजार बनाया?
  • आपने अपनी नेकी को कैसे जाहिर किया?
इस तरह के सवालों के जवाब रोज डायरी में दर्ज करने के दो फायदे होते हैं। जब हम इन्हें लिखते हैं, तो हमें खुशी देने वाली छोटी छोटी बातें याद आती हैं। इससे हमारे पास उन छोटी से छोटी बातों का भी रिकॉर्ड तैयार होता है, जिनसे हमें खुशियां हासिल हुईं। हम इन्हें बाद में भी याद करके खुश हो सकते हैं।
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Happiness - फोटो : पेक्सेल्स
साफ सफाई भी एक विकल्प है, सोशल मीडिया का संतुलित इस्तेमाल करें
जिंदगी की आपाधापी में हम अक्सर अपने घर की साफ सफाई नहीं कर पाते हैं। पूरा घर बिखरा, बेतरतीब रहा आता है। खाली वक्त में घर को संवारा जा सकता है। अगर आप घर से काम कर रहे हैं, तो आप पहले अपने बेडरूम या लिविंग रूम के उन कोनों में भी झांक सकते हैं, जहां आम तौर पर आपकी नजर नहीं जाती।

फ्रिज या किचन साफ कर सकते हैं। किचन की अनदेखी से अक्सर हमारा हाथ ऐसी चीजों की तरफ बढ़ता है, जिनसे सेहत का भला नहीं होता, जैसे कि जंक फूड। अगर किचन और घर को आप नए सिरे से संवारेंगे, तो बहुत सी बेकार हुई चीजों से भी निजात मिलेगी और घर भी निखरेगा।

इन दिनों सोशल मीडिया में आपको बुरी खबरों की बाढ़ ही दिखेगी। लेकिन, कई लोगों के लिए सोशल मीडिया से लगातार जुड़े रहना जरूरी होता है। कुछ के लिए ये पेशे की मजबूरी है। तो कई लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दोस्तों, परिजनों से जुड़े रहते हैं। इस मुश्किल का हल ये हो सकता है कि बेडरूम में फोन की एंट्री बंद कर दें। या मोबाइल से कब दूर रहना है, ये तय करके उसका सख्ती से पालन करें।
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