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H1N1 Infection: स्वाइन फ्लू के खतरे को लेकर अलर्ट, जानिए ये सामान्य सर्दी-जुकाम वाली बीमारी से कितना अलग

Tue, 23 Jun 2026 04:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वाइन फ्लू और सामान्य फ्लू के शुरुआती लक्षण इतने मिलते-जुलते हैं कि बिना जानकारी के इनके बीच अंतर करना आसान नहीं होता। फर्क तब समझ आता है जब संक्रमण तेजी से बढ़ने लगता है। आइए जान लेते हैं कि इन दोनों में कैसे अंतर किया जा सकता है?
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फ्लू की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
संक्रामक बीमारियां समय के साथ अब बहुत कॉमन होती जा रही हैं। कमजोर होती लोगों की इम्युनिटी और वायरस-बैक्टीरिया के नए स्ट्रेन लगातार खतरा बढ़ाते हुए देखे जा रहे हैं। पिछले एक महीने से दक्षिण भारत का राज्य केरल, शिगेला और निपाह जैसे संक्रामक रोगों के चपेट में है। इस बीच कर्नाटक में H1N1 (स्वाइन) फ्लू को लेकर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने इससे एक व्यक्ति की मौत की जानकारी दी थी। एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य विभाग मृतक के परिवार और करीबी सदस्यों की निगरानी कर रहा है, ताकि संक्रमण के फैलने की आशंका को रोका जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू के लक्षण आमतौर पर सामान्य इंफ्लुएंजा यानी सर्दी-जुकाम वाली बीमारी से मिलते-जुलते होते हैं। यही कारण है कि अक्सर लोग दोनों बीमारियों में अंतर नहीं कर पाते। आमतौर पर बीमारी का सही पता तब चलता है जब संक्रमण तेजी से बढ़ने लगता है और मरीज को सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार और गंभीर जटिलताएं होने लग जाती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कर्नाटक में स्वाइन फ्लू से हुई मौत को लेकर अलर्ट कर रहे हैं ऐसे में ये जान लेना जरूरी है कि स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम वाले वायरस में क्या अंतर है और इसकी पहचान कैसे की जाए?
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इन्फ्लूएंजा संक्रमण का खतरा - फोटो : Freepik.com
मौसम बदलते ही बढ़ जाता है खतरा

एच1एन1 भी इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक प्रकार है, लेकिन इसकी संक्रमण क्षमता, जोखिम और कुछ मामलों में बीमारी की गंभीरता सामान्य मौसमी फ्लू से ज्यादा होती है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग इसके कारण ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। 
 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मौसम बदलते ही श्वसन संबंधी वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • इन्फ्लूएंजा, एच1एन1, रेस्पिरेटरी वायरल संक्रमण और अन्य संक्रामक बीमारियां इन दिनों में ज्यादा रिपोर्ट की जाती हैं। 
  • भीड़भाड़ वाले स्थानों, स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक परिवहन में ये संक्रमण तेजी से फैलते हैं।
  •  जिन लोगों को लंबे समय तक तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी या गंभीर कमजोरी महसूस हो, उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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स्वाइन फ्लू का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
पहले एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के बारे में जानिए

एच1एन1, इन्फ्लूएंजा-ए वायरस का एक उपप्रकार है जो श्वसन संक्रमण पैदा करता है। डॉक्टर कहते हैं, इसके अधिकांश मरीज आसानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में यह निमोनिया, सांस की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
 
  • जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है या जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी हो उनमें संक्रमण का जोखिम अधिक होता है।
  • संक्रमितों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहने या बंद होने, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द जैसी दिक्कतें होती हैं।

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स्वाइन फ्लू और सामान्य फ्लू के संकेत - फोटो : Adobe Stock
सामान्य सर्दी-जुकाम की समस्या

स्वाइन फ्लू और सामान्य फ्लू दोनों इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होने वाले श्वसन संक्रमण हैं। बस संक्रमण फैलाने वाले वायरस के स्ट्रेन अलग हो सकते हैं। 
 
  • एच1एन1 विशेष रूप से इन्फ्लूएंजा ए वायरस से फैलता है।
  • सामान्य मौसमी फ्लू इन्फ्लूएंजा ए या बी सहित विभिन्न वायरस से हो सकता है। 
  • सामान्य फ्लू में भी बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहने जैसे लक्षण होते हैं।
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डेंगू-मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
कैसे करें अंतर?

मेडिकल रिपोर्टस से पता चलता है कि एच1एन1 और सामान्य फ्लू में अंतर केवल लक्षणों के अनुसार पर करना कठिन हो सकता है। दोनों में बुखार, खांसी, गले में दर्द और शरीर दर्द जैसे संकेत मिल सकते हैं। 
 
  • यदि किसी क्षेत्र में एच1एन1 के मामले बढ़ रहे हों और मरीज गंभीर रूप से बीमार हो, सांस लेने में कठिनाई हो तो डॉक्टर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। 
  • एच1एन1 और सामान्य फ्लू में एक सबसे ज्यादा नोटिस किया जाने वाला अंतर ये है कि एच1एन1 में सामान्य लक्षणों के साथ कुछ लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसे पेट में दर्द और डायरिया जैसी समस्या हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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