जिस हवा में आप रोज सांस ले रहे हैं, क्या वह आपके लिए सुरक्षित है? कहीं यही हवा आपको धीरे-धीरे कैंसर का मरीज तो नहीं बनाती जा रही है?
हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण के खतरे को लेकर फिर से अलर्ट किया है। हवा में मौजूद प्रदूषण को आमतौर पर खांसी, सांस फूलने, आंखों में जलन या फेफड़ों की बीमारी का कारण बताया जाता रहा है। लेकिन विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि प्रदूषण के संपर्क में रहने के नुकसान इससे कहीं ज्यादा गंभीर और खतरनाक हो सकते हैं।
दुनिया के 952 स्थानों से जुटाए गए आंकड़ों और वर्ष 2000 से 2020 के बीच सामने आए करीब 10.9 करोड़ कैंसर मामलों का विश्लेषण करने वाली स्टडी में PM2.5 को सबसे महत्वपूर्ण प्रदूषकों में पाया गया। PM2.5 हवा में तैरने वाले इतने महीन कण होते हैं कि उनकी चौड़ाई इंसान के बाल से भी कई गुना कम होती है। यही छोटा आकार इसे खतरनाक बनाता है, क्योंकि सांस के साथ ये फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और शरीर में कई तरह की जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
अध्ययनकर्ताओं ने चेताया है कि प्रदूषण विशेषतौर पर PM 2.5 के संपर्क में रहने से केवल फेफड़ों के कैंसर का खतरा नहीं रहता है, ये थायरॉयड, भोजन की नली, बड़ी आंत से लेकर ब्रेस्ट कैंसर तक का भी कारण बन सकता है।