बच्चों में ऑटिज्म का खतरा (सांकेतिक)
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अध्ययन में क्या पता चला?
इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने 48 अध्ययनों की समीक्षा की जिसमें 90 लाख से अधिक गर्भवतियों को शामिल किया गया था। निष्कर्ष में पाया गया कि जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की दिकक्त थी उनके बच्चे में ऑटिज्म होने का जोखिम लगभग 60 प्रतिशत अधिक था। शोधकर्ता इस बात पर जोर देते हैं कि इस स्थिति का कोई एक कारण नहीं है, यह आनुवंशिकी और पर्यावरणीय प्रभावों से उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञों ने कहा, हमें ऑटिज्म को बढ़ावा देने वाले जीवनशैली से जुड़े कारक के बारे में पता चला है, जिसपर अगर समय रहते ध्यान दे लिया जाए तो संभवत: बच्चों को ऑटिज्म से बचाया जा सकता है।
गौरतलब है कि ऑटिज्म के लक्षण 3 साल की उम्र से पहले नजर आने लगते हैं जिसमें बच्चों के आंख से संपर्क न करना, बार-बार एक ही क्रिया दोहराना, भाषा विकास में देरी या दूसरों के साथ खेलना पसंद न करना। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑटिज्म का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन अगर गर्भावस्था में सही पोषण, स्वस्थ जीवनशैली और तनावमुक्त वातावरण मिले तो इस रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है। गर्भावस्था में डायबिटीज की स्थिति पर भी ध्यान रखने की आवश्यकता है।