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Asthma Risk: परिवार में पहले से किसी को है अस्थमा तो जान लीजिए ये जरूरी बातें, वरना आप भी हो जाएंगे शिकार

Sat, 23 Aug 2025 06:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भारत में एक लाख से अधिक बच्चों पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर आपके परिवार में पहले से किसी को अस्थमा है तो बच्चों को आइसक्रीम, दही, केले जैसे खाद्य पदार्थों से अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है।
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बच्चों में अस्थमा का खतरा, कैसे करें बचाव? - फोटो : freepik.com
Asthma Risk Factors & Triggers: आजकल सांस से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इनमें सबसे ज्यादा चर्चा अस्थमा की होती है। खासकर बच्चों में यह बीमारी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। अस्थमा दरअसल फेफड़ों की एक क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) बीमारी है, जिसमें सांस की नलियों में सूजन और सिकुड़न आ जाती है। इसकी वजह बलगम बनता है और सांस लेने में कठिनाई, खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसे लक्षण होते हैं। 

शोध बताते हैं कि अस्थमा का सीधा संबंध हमारे वातावरण और जीवनशैली से है। बढ़ते प्रदूषण, धूल-धुआं, सिगरेट का धुआं और एलर्जी इसके बड़े कारण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया में करीब 26 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं और हर साल लाखों नई केस सामने आते हैं। साल 2023 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित थे, जो इस रोग के वैश्विक मामलों का लगग 12.9% था। 

अस्थमा का अभी कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन सही देखभाल और समय पर इलाज से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इसी से संबंधित एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को अस्थमा रहा है उन्हें अपने खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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अस्थमा और इसके जोखिम कारक - फोटो : Freepik.com
बच्चों में अस्थमा का खतरा

भारत में एक लाख से अधिक बच्चों पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर आपके परिवार में पहले से किसी को अस्थमा है तो बच्चों को आइसक्रीम, दही, केले जैसे खाद्य पदार्थों से अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है।

अस्थमा के कारणों को समझने के लिए स्कूल आधारित नेशनल स्टडी में ये चौंकाने वाली बात सामने आई है। हालांकि पहले भी घर के लोग इस तरह की ठंडी तासीर वाली चीजों को खाने से रोकते थे, अब मेडिकल साइंस ने भी इसकी पुष्टि कर दी है।  
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बच्चों में सांस की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

देशभर में दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर सहित नौ प्रमुख केंद्रों में ये अध्ययन किया गया। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. निष्ठा सिंह कहती हैं कि किशोरों में दही, आइसक्रीम, केले और पैक स्नैक्स का सेवन लक्षणों को बढ़ा रहा है। दही और आइसक्रीम ठंडी प्रकृति के होते हैं। ठंडे पदार्थ श्वसन तंत्र की नलिकाओं में सिकुड़न (ब्रॉन्कोस्पाज्म) ला सकते हैं, जिससे गले और श्वसन मार्ग में बलगम गाढ़ा हो सकता है, जो पहले से संकीर्ण वायुमार्ग में रुकावट बढ़ाता है।

चूंकि अस्थमा का खतरा आमतौर पर परिवारों में चलता है यानी कि यदि माता-पिता में से कोई अस्थमा से पीड़ित हो तो बच्चों में इस रोग के विकसित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए पहले से ही ऐसे बच्चों के खानपान को लेकर अलर्ट रहना जरूरी है। 

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अस्थमा को ट्रिगर होने से बचाएं - फोटो : Adobe Stock
पर्यावरणीय स्थितियों को लेकर भी बरतें सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खान-पान में इस तरह की गड़बड़ी के अलावा पर्यावरण से संबंधित फैक्टर्स भी अस्थमा को ट्रिगर करने वाले हो सकते हैं।  घरों में सीलन और फफूंदी, लकड़ी का धुंआ, मिट्टी का तेल और कोयला जैसे बायोमास ईंधन, मच्छर भगाने वाली कॉइल और यातायात से होने वाला प्रदूषण भी अस्थमा को ट्रिगर करने वाला हो सकता है।

जिन लोगों को पहले से अस्थमा है या जिनमें इसका खतरा हो सकता है, ऐसे लोगों को इन कारकों से भी बचाव करते रहना चाहिए।
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मेकअप और इससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Amarujala.com
मेकअप से अस्थमा का खतरा

अस्थमा के बढ़ते मामलों के बारे में समझने के लिए हाल ही में किए गए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया है कि नियमित रूप से मेकअप करने से वयस्कता में अस्थमा होने का खतरा बढ़ सकता है। शोध में लिपस्टिक, आईशैडो और मस्कारा जैसे उत्पादों का इस्तेमाल करने वालों में श्वसन से संबंधित क्रॉनिक समस्याओं के खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। 

हफ्ते में पांच या उससे ज्यादा बार ब्लश और लिपस्टिक लगाने से यह खतरा 18 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसलिए अगर आप भी खूब सारा मेकअप करने की शौकीन हैं तो इन जोखिमों के बारे में जरूर जानना चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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स्रोत
Risk factors for asthma across India: Results from global asthma network (GAN) phase I study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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