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Health Alert: बारिश में ये चीजें खाईं तो पहुंच जाएंगे अस्पताल, डॉक्टरों की ये सलाह सबके लिए जरूरी

Fri, 24 Jul 2026 10:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फूड पॉइजनिंग ऐसी स्थिति है जिसमें दूषित भोजन या पानी के जरिए बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनके विषैले पदार्थ शरीर में पहुंच जाते हैं। इसके बाद कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के भीतर उल्टी, दस्त, पेट दर्द, जी मिचलाना, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण शुरू हो सकते हैं।
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फूड पॉइजनिंग का बढ़ता खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
बारिश का मौसम आते ही कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों के अलावा खान-पान में गड़बड़ी की भी दिक्कत काफी बढ़ जाती है। इन दिनों खान-पान की लापरवाही फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन जाती है। 

हर साल बारिश के मौसम में अस्पतालों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण भोजन और पानी में बैक्टीरिया, वायरस या परजीवियों का तेजी से पनपना है। मानसून में हवा में नमी अधिक होने के कारण खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं। यदि खाना लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा रहे, ठीक से पकाया न गया हो या दूषित पी लें तो फूड पॉइजनिंग हो सकती है।

आइए जानते हैं कि आप इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है?
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फूड पॉइजनिंग की दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
फूड पॉइजनिंग के बारे में जान लीजिए

दूषित भोजन या पानी के जरिए बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी शरीर में पहुंचकर फूड पॉइजनिंग की समस्या का कारण बनते हैं। इसमें उल्टी-दस्त, पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अधिकांश मामलों में आराम और पर्याप्त तरल पदार्थ से मरीज ठीक हो जाता है, लेकिन गंभीर संक्रमण होने पर जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
 
  • बारिश के मौसम में नमी और तापमान कई सूक्ष्मजीवों को बढ़ाने वाले होते हैं।
  • भोजन को लंबे समय तक बाहर रखने, दूषित पानी पीने और सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। 
  • मक्खियां भी गंदगी से बैक्टीरिया भोजन तक पहुंचा सकती हैं। 
  • यही वजह है कि मानसून में फूड पॉइजनिंग के मामले अन्य मौसमों की तुलना में अधिक देखे जाते हैं।
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पेट की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
फूड पॉइजनिंग में क्या दिक्कतें होती हैं?

फूड पॉइजनिंग के कारण उल्टी-दस्त और पेट में मरोड़ जैसी दिक्कतें होती हैं। इसके अलावा कुछ लोगों में जी मिचलाने, बुखार, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने की दिक्कत हो सकती है।
 
  • यदि दस्त में खून आए, तेज बुखार हो, बार-बार उल्टी हो या शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • पांच वर्ष से छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं में संक्रमण जल्दी गंभीर हो सकता है। 
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खान-पान का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
फूड पॉइजनिंग से बचाव कैसे करें?
 
  • फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए  हमेशा ताजा भोजन करें और खाने को अच्छी तरह पकाएं।
  • साफ पानी पीना, हाथ धोकर खाना खाना और बाहर का खुला खाना खाने से बचें।

बारिश के मौसम में खुले में रखी कटी हुई सब्जियां आसानी से बैक्टीरिया और वायरस से दूषित हो सकती हैं। यदि पानी साफ न हो या बर्तन ठीक से साफ न किए गए हों, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए मानसून में सड़क किनारे मिलने वाली चीजों को लेकर सावधानी बरतें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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