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Health Alert: मानसून में डायरिया-पेट दर्द को न लें हल्के में, कहीं ये फूड पॉइजनिंग तो नहीं?

Sat, 11 Jul 2026 09:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फूड पॉइजनिंग के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए और सही देखभाल की जाए तो अधिकांश मामलों में मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। आइए जानते हैं कि इसकी पहचान कैसे करें?
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फूड पॉइजनिंग की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
बारिश का मौसम कई बीमारियों को भी अपने साथ लेकर आता है। मानसून शुरू होते ही अस्पतालों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। फूड पॉइजनिंग के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अस्पतालों में भर्ती तक होना पड़ता है। सड़क किनारे मिलने वाले जूस या लंबे समय तक रखा हुआ खाना खाने से ये समस्या बढ़ जाती है। 

समस्या यह है कि पेट दर्द होने पर ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते कि यह सामान्य अपच की दिक्कत है या फूड पॉइजनिंग की शुरुआत? कुछ लोग बार-बार होने वाली उल्टी और दस्त पर ध्यान नहीं देते, जिससे  शरीर में तेजी से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लग जाती है। पेट में दर्द होने पर अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के पेन किलर या एंटीबायोटिक खा लेते हैं, जिससे बीमारी और गंभीर हो सकती है।

आइए समझ लेते हैं कि पेट की दिक्कतों में कब समझ जाना चाहिए कि ये फूड पॉइजनिंग है?
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बारिश के दिनों में पेट की दिक्कतें - फोटो : adobe stock images
बारिश के दिनों में रहें अलर्ट

बारिश के मौसम में साल्मोनेला, ई.कोलाई जैसे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। इनसे दूषित पानी और भोजन से लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानसून के दौरान भोजन की स्वच्छता, साफ पानी पीने और ताजा भोजन करने की सलाह देते हैं।
 
  • डॉक्टर कहते हैं, यदि फूड पॉइजनिंग के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो अधिकांश मामलों में मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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फूड पॉइजनिंग का खतरा - फोटो : Freepik.com
मानसून में फूड पॉइजनिंग का खतरा

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक रहती है, जिससे बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से बढ़ते हैं। यदि भोजन को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर रखा जाए तो उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव पनपने लगते हैं। 
 
  • सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, खुले में रखे फल-सब्जियां संक्रमण का कारण बन सकते हैं। 
  • मानसून में मक्खियां भी अधिक होती हैं, जो गंदगी से बैक्टीरिया उठाकर भोजन तक पहुंचाती हैं। 
  • यही वजह है कि इस मौसम में दस्त, उल्टी और पेट संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं।

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पेट की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
सामान्य पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग में कैसे फर्क करें?

सामान्य पेट दर्द अक्सर गैस, अपच या ज्यादा खाने की वजह से होता है और कुछ समय में ठीक हो जाता है। लेकिन यदि पेट दर्द के साथ बार-बार उल्टी, दस्त, मतली, बुखार, कमजोरी या पेट में ऐंठन हो रही हो तो यह फूड पॉइजनिंग का संकेत हो सकता है।
 
  • कई मामलों में शौच में खून और तेज बुखार की भी दिक्कत हो सकती है। 
  • यदि लक्षण 1-2 दिनों से ज्यादा रहें या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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फूड पॉइजनिंग हो जाए तो क्या करें? - फोटो : Adobe stock
फूड पॉइजनिंग हो जाए तो क्या करें?

यदि फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखाई दें तो सबसे पहले शरीर में पानी की कमी न होने दें। ओआरएस का घोल, साफ पानी, नारियल पानी और तरल पदार्थ लेते रहें। 
 
  • शुरुआत में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें। 
  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवा नहीं लेनी चाहिए।
  • लगातार उल्टी, तेज बुखार, शौच में खून जैसे लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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