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सेहत की बात: हीटर के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों में हो सकती है यह गंभीर समस्या, विशेषज्ञ से जानिए कैसे करें बचाव?

Tue, 25 Jan 2022 03:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हीटर से आंखों में हो सकती है समस्या - फोटो : iStock
Medically Reviewed by-
डा. कमल बी कपूर
(मेडिकल डायरेक्टर, नेत्र रोग विशेषज्ञ)
दिल्ली
अनुभव- 25 वर्ष


सर्दी के इस मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए हम तरह-तरह के उपाय करते रहते हैं। हीटर और ब्लोवर जैसे उपकरण इसमें काफी मददगार माने जाते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि शरीर को कृत्रिम गर्मी देने वाले इन उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल आपके लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हीटर और ब्लोवर से निकलने वाली गर्म हवा के सीधे संपर्क में आने से त्वचा और आंखों को क्षति पहुंच सकती है। कुछ स्थितियों में यह हवा आपकी आंखों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हीटर जैसे उपकरणों से निकलने वाली हवा आपके आस-पास की हवा में मौजूद नमी की मात्रा को कम कर देती है। इसके कारण हवा शुष्क हो जाती है, जो  त्वचा के रूखेपन और खुजली जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसके अलावा हीटर या ब्लोवर के ज्यादा इस्तेमाल के कारण आपकी आंखों को भी क्षति पहुंच सकती है, इससे निकलने वाली हवा आंखों की भी नमी को प्रभावित कर देती है, जिसके कारण लोगों को ड्राई आइज और इससे संबंधित अन्य समस्याएं हो सकती है। यही कारण है कि ऐसे उपकरणों के कम से कम इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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आंखों के सूखापन की दिक्कत - फोटो : iStock
बढ़ रही है ड्राई आइज की समस्या
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ कमल बी कपूर बताते हैं, सर्दियों के मौसम में लोगों में ड्राई आइज की समस्या अधिक देखने को मिलती है, इसका एक कारण उपकरणों से निकलने वाली गर्म हवा के सीधे संपर्क में आना भी माना जा सकता है। ड्राई आइज की समस्या तब होती है जब आंख या तो पर्याप्त मात्रा में आंसू का उत्पादन नहीं कर पाते हैं या आंखों को चिकनाई देने के लिए गुणवत्ता वाले आंसू की कमी हो जाती है। इस स्थिति में आंखों में लालिमा, खुजली या जलन की समस्या हो सकती है। 
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ड्राई आइज की समस्या हो सकती है गंभीर - फोटो : Pixabay
आंखों को हो सकती है गंभीर क्षति
डॉ कमल बताते हैं, जिन लोगों को पहले से ही ड्राई आइज की समस्या होती है, उनमें हीटर के इस्तेमाल के कारण कभी-कभी लक्षण और भी गंभीर हो जाते हैं। विशेष रूप से कार के हीटर से निकलने वाली हवा, वातावरण को शुष्क बना देती है, जिससे ऐसे लोगों की दिक्कतें और अधिक बढ़ सकती हैं। हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इन उपकरणों से निकलने वाली गर्म हवा का सीधे तौर पर आंखों से संपर्क न हो। ये ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है।

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आंखों का रखें ख्याल - फोटो : pixabay
इन बातों को ध्यान में रखकर कर सकते हैं बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सर्द मौसम से बचाव के लिए गर्म हवा वाले उपकरणों का इस्तेमाल करना हमारी जरूरत बन गई है, पर अगर इनके इस्तेमाल के दौरान कुछ बातों को ध्यान में रखा जाए तो इससे होने वाली समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
  • गर्म हवा के प्रवाह को सीधे शरीर के संपर्क में लाने से बचें। यह सुनिश्चित करें कि गर्म हवा सीधे आपकी आंखों में न जाने पाए।
  • ठंडी या गर्म हवाओं से आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनकर रखें, ये आंसुओं को वाष्पित होने से रोकने में मदद करते हैं।
  • शरीर को हाइड्रेटेड रखें। खूब पानी पीना सिर्फ गर्मियों में ही नहीं है, सर्दियों के मौसम में भी जरूरी होता है। तरल पदार्थों का सेवन करने से आपकी आंखों सहित शरीर के सभी हिस्सों को हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलेगी।
  • पलकों को बार-बार झपकने का अभ्यास करते रहें। ऐसा करने से आंखें की चिकनाई बनी रहती है। 
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आंखों को स्वस्थ रखने के तरीके - फोटो : Pixabay
ड्राई आइज को कैसे ठीक करें?
यदि आपको ड्राई आइज की समस्या महसूस होती है, तो बिना देर किए किसी अच्छे नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें। सामान्य स्थितियों में कुछ आई-ड्रॉप्स की मदद से इस समस्या को ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर आपको कुछ अभ्यास भी बता सकते हैं जिससे आंखे के सूखापन को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है। खास बात का ध्यान रखें को आंखे के सूखापन की समस्या को नजरअंदाज न करें, वरना यह बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।


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नोट: यह लेख डॉ. कमल बी कपूर (मेडिकल डायरेक्टर, शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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