कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों के मौत के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। डॉक्टर तरह-तरह के उपायों को प्रयोग में लाकर रोगियों की जान बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।रेमडेसिविर इंजेक्शन, मेडिकल ऑक्सीजन, फेवीफ्लू और प्लाजमा थेरपी को डॉक्टर ऐसे ही 'संजीवनी' के रूप में देख रहे हैं, जिससे रोगियों की जान बचाने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। हालांकि अब ऐसी खबरें आ रही हैं जिसमें कहा जा रहा है कि प्लाज्मा थेरेपी को जल्द ही भारत में कोविड उपचार की गाइडलाइंस से हटाया जा सकता है।
प्लाजमा थेरपी के लिए कोविड से ठीक हो चुके व्यक्ति के खून में मौजूद एंटीबॉडीज, किसी रोगी को चढ़ाई जाती है। माना जाता रहा है कि ऐसा करने से रोगी के शरीर में भी वायरस से मुकाबला करने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज हो जाती हैं। जिससे उसकी जान बचाई जा सकती है। आइए जानते हैं अब इस संजीवनी को हटाने पर विचार क्यों किया जा रहा है?