फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विशेषज्ञ की चेतावनी: इस दवा के बेवजह इस्तेमाल ने बढ़ा दिया है हृदय रोगों का खतरा, विशेष सावधानी की जरूरत

Fri, 28 May 2021 04:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
कोरोना के कारण हृदय रोगों का समस्या - फोटो : Pixabay
डॉ अल्केश जैन
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ
मेदांता, इंदौर

Medically reviewed by Dr. Alkesh Jain

कोविड-19 को मुख्यरूप से श्वसन संक्रमण की बीमारी के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि संक्रमण की इस दूसरी लहर में वायरस के कारण कई अन्य तरह की समस्याएं भी देखने को मिली हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान एक महत्वपूर्ण अंग जिसे सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है वह है- हृदय। डॉक्टर बताते हैं कि वायरस में म्यूटेशन और नए स्ट्रेनों के कारण
कोविड रोगियों में दिल के दौरे पड़ने के मामले देखे गए हैं। इसके अलावा कोविड के कारण हृदय रोगों से पीड़ित युवा और स्वस्थ लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी भी हुई है, जोकि काफी चिंताजनक है। आइए इस लेख में जानते हैं कि कोरोना वायरस, हृदय संबंधी समस्याओं को क्यों बढ़ा रहा है?
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
कार्डियक अरेस्ट और हृदय संबंधी जटिलताएं - फोटो : Pixels
कार्डियक अरेस्ट जैसे गंभीर मामले बढ़े
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के कारण लोगों में खून के थक्के बनने के मामलों में इजाफा देखने को मिला है, जिसका अर्थ है कि कोरोना वायरस लिम्बिक सिस्टम और रक्त वाहिकाओं के लिए भी उतना ही खरतनाक है जितना कि फेफड़ों के लिए। डॉक्टरों बताते हैं कि कुछ मामलों में यह वायरस रक्त के थक्कों का निर्माण कर रहा है जो आंतरिक रक्त वाहिकाओं के अस्तर को नुकसान पहुंचाता है। इसके चलते लोगों में कार्डियक अरेस्ट और हृदय संबंधी अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ा गया है। 
विज्ञापन

3 of 6
ब्लड थिनर दवाओं का इस्तेमाल - फोटो : iStock
क्यों बढ़ रहे हैं हृदय रोगों के मामले?
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अल्केश जैन बताते हैं कि कोविड के इलाज के दौरान ब्लड थिनर दवाओं का बेवजह इस्तेमाल करना इस तरह की समस्याओं का कारण हो सकता है। इसके अलावा कोरोना के समय में अत्यधिक चिंता और भय के कारण शरीर को अधिक रक्त पंप करना पड़ता है जिससे हृदय गति और हृदय पर दबाव बढ़ जाता है। यह भी हृदय संबंधी तमाम समस्याओं का कारण हो सकता है।

4 of 6
रक्त का थक्का बना रहे हैं कोरोना वायरस - फोटो : iStock
हृदय रोग और कोरोना संक्रमण
डॉ अल्केश जैन कहते हैं कि कोरोना के रोगियों में संक्रमण के दौरान हृदय से जुड़ी कई तरह की बीमारियों के बारे पता चल रहा है। कुछ मरीजों के हृदय के भीतर की नलियों में खून का थक्का जमने की समस्या का भी निदान किया गया है। यही कारण है कि कोरोना के कई रोगियों को दिल का दौरा भी पड़ रहा है। कोरोना से ठीक हो चुके रोगियों में भी हाल के दिनों में हार्ट अटैक और हृदय के अन्य रोगों का खतरा ज्यादा देखने को मिला है।
 
विज्ञापन

5 of 6
हृदय रोग का खतरा बढ़ा - फोटो : Pixabay
नए स्ट्रेनों ने बढ़ा दी है समस्या
डॉ अल्केश कहते हैं कि जिन संक्रमितों में हृदय रोगों का निदान होता है उन्हें इलाज के दौरान ही खून को पतला करने वाली दवाइयां और इंजेक्शन दे दी जाती हैं, लेकिन हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं है। इसके अलावा होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना के कई रोगी पल्स रेट कम होने की भी शिकायत कर रहे हैं, ऐसे रोगियों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कोरोना की पहली लहर में इस तरह के मामले देखने को नहीं मिल रहे थे, लेकिन वायरस के म्यूटेशन के बाद नए स्ट्रेनों ने रोगियों में हृदय रोग की समस्याओं को बढ़ा दिया है।  
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
पल्स रेट की जांच करते रहें - फोटो : Pixabay
अचानक से पल्स रेट कम हो जाना
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अल्केश जैन कहते हैं कि पिछले दिनों हमने कई ऐसे मामले भी देखे हैं जिसमें रोगियों की पल्स रेट अचानक से 25 से 30 के बीच पहुंच जा रही है। ऐसी स्थिति में रोगियों को घबराना नहीं चाहिए, उन्हें इस बारे में किसी हृदय रोग विशेषज्ञ से बात करना चाहिए। अब तक ऐसे कोई भी मामले देखने को नहीं मिले हैं जिसमें पल्स रेट कम होने के कारण रोगियों को कोई गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा हो। कोविड की रिकवरी के साथ प्राय: यह समस्या भी दूर हो जाती है।

-----------------------------
नोट: यह लेख मेदांता इंदौर में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अल्केश जैन से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ अल्केश को हृदय रोग के इलाज का लंबा अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें