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Health Alert: कमर पर बढ़ते फैट के साथ बढ़ जाता है बांझपन का खतरा, आप भी हो जाएं अलर्ट

Fri, 07 Nov 2025 05:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मौजूदा समय में इंफर्टिलिटी यानी बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एक समय था जब यह समस्या उम्रदराज महिलाओं में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र की महिलाएं भी इससे जूझ रही हैं। आधुनिक जीवनशैली, तनाव, असंतुलित खानपान और हार्मोनल असंतुलन इसके प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहे हैं।
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गर्भधारण में समस्या - फोटो : Amar Ujala
मोटापा या बेली फैट बढ़ना मौजूदा समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग, महिला और पुरुष सभी इसकी गिरफ्त में देखे जा रहे हैं। तमाम मेडिकल रिपोर्ट्स से हम सभी इतना तो समझ ही गए हैं कि मोटापा सिर्फ लुक खराब होने की समस्या नहीं है, ये कई गंभीर बीमारियों का जड़ भी है।

आमतौर पर शरीर पर बढ़े हुए फैट को हृदय रोग, डायबिटीज से लेकर कैंसर जैसी समस्याओं का कारण माना जाता रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि इसके कारण आपके मां बनने का सपना भी सपना ही रह सकता है?

मौजूदा समय में इंफर्टिलिटी यानी बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एक समय था जब यह समस्या उम्रदराज महिलाओं में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र की महिलाएं भी इससे जूझ रही हैं। आधुनिक जीवनशैली, तनाव, असंतुलित खानपान और हार्मोनल असंतुलन इसके प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गड़बड़ लाइफस्टाइल के कारण तो इंफर्टिलिटी बढ़ी ही है, इसके अलावा मोटापा विशेषतौर पर बेली फैट का भी इसमें बड़ा योगदान है।
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बेली फैट घटा देती है गर्भधारण की संभावना - फोटो : Adobe stock
प्रजनन संबंधित समस्याओं के क्या कारण हैं?

अध्ययनों से पता चलता है कि जिन महिलाओं को बेली फैट की दिक्कत होती है उनमें प्रजनन संबंधित समस्याएं भी अधिक देखी जाती रही हैं। कमर के चारों ओर हर अतिरिक्त सेंटीमीटर फैट बढ़ने से महिलाओं में बांझपन का खतरा तीन प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 18 से 45 वर्ष की आयु की 3,200 महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया। विशेषज्ञों ने बताया, यहां इंफर्टिलिटी का मतलब एक साल से गर्भधारण करने की कोशिश में सफलता न मिलने से था।
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पेट की चर्बी कई कारणों से खतरनाक - फोटो : Adobe stock photos
बेली फैट बढ़ने से बांझपन का हो सकता है खतरा

अध्ययन में पता चला कि जिन महिलाओं की कमर की परिधि (फैट) 60 सेमी थी, उनमें बांझपन की दर सबसे कम थी। जबकि जिन महिलाओं की कमर की परिधि 160 सेमी या उससे अधिक थी, उनमें बांझपन का खतरा सबसे अधिक देखा गया।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया जिन महिलाओं के कमर की माप 113 सेमी तक थी, उन महिलाओं ने शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम की मदद से अपने जोखिमों को कम करने में सफलता भी पाई।

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वेट लॉस करने से भी मिलती है मदद - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि आपकी हृदय गति बढ़ाती है, आपकी सांसें तेज हो जाती हैं और इससे आपको पसीना आता है। मध्यम तीव्रता वाली गतिविधियों के उदाहरणों में तेज चलना, रनिंग और साइकिलिंग शामिल है। इसकी मदद से आप वेट लॉस और बेली फैट भी कम कर सकती हैं। 

चीन के हुईझोउ सेंट्रल पीपुल्स हॉस्पिटल की टीम ने कहा, कमर की माप कम करने वाले प्रयास आपके मां बनने के सपने को पूरा करने में मददगार हो सकती हैं। गर्भधारण करने की कोशिश कर रही महिलाएं अपनी कमर की माप पर नजर रखें और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ा लें तो इससे गर्भवती होने की संभावना बढ़ा सकती है।
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गर्भधारण में आने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
इन जोखिम कारकों पर भी दें ध्यान
  • विशेषज्ञों ने कहा ,लाइफस्टाइल फैक्टर्स जैसे देर रात तक जागना, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड चीजों का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मोटापा महिलाओं के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है। इससे ओव्यूलेशन पर असर पड़ता है, जो गर्भधारण में सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
  • इसके अलावा कामकाजी महिलाओं में बढ़ता मानसिक तनाव भी गर्भधारण में मदद करने वाले हार्मोन्स को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक तनाव रहने से मासिक धर्म अनियमित हो सकता है और गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है। इन आदतों में सुधार करना भी जरूरी हो जाता है।



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स्रोत
Association between waist circumference and female infertility in the United States


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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