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Cancer Risk: ये आदतें नहीं छोड़ीं तो कैंसर आपको नहीं छोड़ेगा, समय रहते हो जाइए सावधान

Fri, 07 Aug 2026 06:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के विशेषज्ञ कहते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर को रोका जा सकता है। धूम्रपान छोड़ना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, पौष्टिक भोजन करना, शराब से दूरी और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसी आदतें कई प्रकार के कैंसर का खतरा कम कर सकती हैं।
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कैंसर का बढ़ता जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI
जिन बीमारियों के कारण दुनियाभर में हर साल सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है, कैंसर उनमें से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर हर साल करीब 1 करोड़ लोगों की जान ले रहा है, जो कुल मौतों में से लगभग हर छठी मौत के लिए जिम्मेदार है। कैंसर दुनियाभर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी माना जाता है।

कैंसर को अक्सर लोग आनुवंशिक बीमारी मान लेते हैं, जबकि वैज्ञानिक बताते हैं कि इसका बड़ा कारण हमारी जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियां भी हैं। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) के अनुसार दुनियाभर में होने वाले कई प्रकार के कैंसर ऐसे हैं जिनका संबंध सीधे हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली से है। यानी हम जो खाते हैं, धूम्रपान या शराब जैसी आदतें अपनाते हैं और अपने शरीर का कितना ध्यान रखते हैं, ये सभी चीजें कैंसर के खतरे को काफी हद तक प्रभावित करती हैं।

यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कैंसर के खतरे को कम करने के लिए अपनी लाइफस्टाइल को सुधारने पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।
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कैंसर का जोखिम - फोटो : Adobe Stock
आखिर कैसे होता है कैंसर?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कैंसर अचानक नहीं होता। शरीर की कोशिकाओं में वर्षों तक होने वाले छोटे-छोटे नुकसान धीरे-धीरे डीएनए में बदलाव पैदा करते हैं। जब शरीर इन खराब कोशिकाओं को नियंत्रित नहीं कर पाता, तब कैंसर विकसित हो सकता है। यही कारण है कि कुछ गलत आदतें वर्षों तक बिना किसी लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं।

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी का अनुमान है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई तरह के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धूम्रपान छोड़ना, वजन को कंट्रोल रखना, पौष्टिक भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसी आदतें आपके खतरे को कम करने में काफी मददगार हो सकती हैं।

आइए जानते हैं कि विशेषज्ञ किन आदतों को सबसे नुकसानदायक बताते हैं?
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स्मोकिंग के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepil.com
तंबाकू और सिगरेट सबसे खतरनाक

डब्ल्यूएचओ के अनुसार तंबाकू दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़े रोके जा सकने वाला कारणों में से एक है। 
  • सिगरेट-बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू सभी खतरनाक हैं। इनमें 70 से अधिक ऐसे रसायन पाए जाते हैं जो कैंसर पैदा कर सकते हैं।
  • धूम्रपान से फेफड़ों के कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ता है। 
  • तंबाकू-धूम्रपान से मुंह, गला, भोजन नली, मूत्राशय-अग्न्याशय से लेकर किडनी और पेट के कैंसर का जोखिम भी बढ़ जाता है। 

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शराब के नुकसान - फोटो : Freepik.com
शराब पीना खतरनाक

बहुत से लोग मानते हैं कि सीमित मात्रा में शराब नुकसान नहीं करती, लेकिन आईएआरसी की रिपोर्ट कहती है कि शराब की थोड़ी मात्रा भी कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
 
  • शराब शरीर में टूटकर एसीटैल्डिहाइड बनाती है, जो डीएनए को नुकसान पहुंचाता है। 
  • इससे मुंह, गले, भोजन नली, लिवर, स्तन और बड़ी आंत के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
  • शराब के साथ धूम्रपान की आदत कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ाने वाली हो सकती है।
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वजन बढ़ने की समस्या - फोटो : Freepik.com
मोटापा भी बड़ा खतरा

अधिक वजन केवल डायबिटीज और हृदय रोग का कारण नहीं है, बल्कि इससे कई प्रकार के कैंसर का भी जोखिम हो सकता है।
 
  • मोटापे की स्थिति शरीर में सूजन और हार्मोनल बदलाव को बढ़ावा देती है जिससे कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने में मदद मिलती है।
  • मोटापे को अध्ययन में स्तन, कोलन, एंडोमेट्रियल, किडनी-लिवर सहित कई अन्य प्रकार के कैंसर का कारण पाया गया है।


प्रोसेस्ड चीजें खाने से खतरा

प्रोसेस्ड मीट,  नमक-चीनी ज्यादा खाने और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के कारण भी शरीर में कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। आईएआरसी  ने प्रोसेस्ड मीट को ग्रुप-1 कार्सिनोजेन की श्रेणी में रखा है। इसके अधिक सेवन से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा हो सकता है। इसी तरह से प्रोसेस्ड चीजों में नमक-चीनी और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा अधिक होती है इसके कारण भी कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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