Cause Of Gallbladder Stone: आज के समय में गॉल ब्लैडर में स्टोन होना बेहद आम बात हो गई है। इसके पीछे की वजह क्या है और इस दिक्कत के लक्षण क्या हैं, आइए जानते हैं।
Cause Of Gallbladder Stone: गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) में स्टोन आज के समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। शुरुआत में कण बहुत छोटे होते हैं, लेकिन समय के साथ इनका आकार बढ़कर स्टोन बन जाता है। ऐसे में कई लोगों को लंबे समय तक इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते, जबकि कुछ लोगों में अचानक काफी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं।
यदि समय पर इसका पता न लगाया जाए तो यह संक्रमण, सूजन या पित्त नली में रुकावट जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसलिए इसके कारण, लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
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गॉल ब्लैडर में स्टोन कब बन जाता है?
- फोटो : AI
सबसे पहले जानें कि गॉल ब्लैडर में स्टोन कब बन जाता है?
गॉल ब्लैडर में स्टोन तब बनता है जब पित्त में मौजूद रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है। सामान्यतः पित्त में कोलेस्ट्रॉल, बाइल सॉल्ट और बिलीरुबिन उचित मात्रा में होते हैं। लेकिन जब कोलेस्ट्रॉल अधिक हो जाता है या पित्ताशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, तब धीरे-धीरे छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं। यही क्रिस्टल समय के साथ बड़े होकर स्टोन का रूप ले लेते हैं।
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गॉल ब्लैडर स्टोन बनने के प्रमुख कारण
ज्यादा तैलीय, तला-भुना और हाई फैट वाले खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन पित्त (Bile) में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा सकता है।
शरीर में अतिरिक्त चर्बी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकती है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।
क्रैश डाइट, लंबे समय तक उपवास या अचानक वजन कम करने से लीवर अधिक कोलेस्ट्रॉल छोड़ सकता है, इससे गॉल ब्लैडर सामान्य रूप से खाली नहीं हो पाता और स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।
काफी देर तक भोजन न करने पर गॉल ब्लैडर नियमित रूप से खाली नहीं हो पाता। पित्त लंबे समय तक जमा रहने से उसमें कण बनने लगते हैं, जो आगे चलकर पथरी में बदल सकते हैं।
डायबिटीज के मरीजों में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ सकता है, जो गॉल स्टोन बनने का जोखिम बढ़ा सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ गॉल ब्लैडर की कार्यक्षमता में बदलाव आ सकता है। 40 वर्ष के बाद गॉल स्टोन का खतरा अपेक्षाकृत बढ़ जाता है।
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गॉल ब्लैडर स्टोन के लक्षण
यह गॉल स्टोन का सबसे सामान्य लक्षण है। दर्द अचानक शुरू हो सकता है और कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक बना रह सकता है।
खासतौर पर तैलीय या भारी भोजन करने के बाद गॉल ब्लैडर सिकुड़ता है, जिससे पथरी होने पर दर्द अधिक महसूस हो सकता है।
दर्द के साथ जी मिचलाना या उल्टी होना भी गॉल स्टोन का संकेत हो सकता है।
बार-बार पेट फूलना, भारीपन, डकार आना और अपच की समस्या भी कई मरीजों में देखी जाती है।
कुछ लोगों में दर्द दाहिने कंधे या पीठ तक फैल सकता है। इसे "रिफर्ड पेन" कहा जाता है।
यदि पथरी पित्त नली में फंस जाए और संक्रमण हो जाए, तो तेज बुखार, ठंड लगना, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
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गॉल ब्लैडर स्टोन से बचाव के उपाय
फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन को प्राथमिकता दें।
रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि वजन नियंत्रित रखने और गॉल स्टोन के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
शरीर को हाइड्रेट रखने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और पित्त का प्रवाह भी सामान्य बना रहता है।
समय पर भोजन करने से गॉल ब्लैडर नियमित रूप से खाली होता रहता है, जिससे पथरी बनने का जोखिम कम हो सकता है।
यदि वजन कम करना चाहते हैं, तो धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से करें। बहुत तेजी से वजन घटाने से बचें।
गॉल स्टोन का इलाज उसकी स्थिति, आकार और लक्षणों पर निर्भर करता है।
यदि पथरी है लेकिन कोई लक्षण नहीं हैं, तो कई मामलों में केवल नियमित निगरानी की सलाह दी जाती है।
हल्के लक्षण होने पर डॉक्टर दर्द नियंत्रित करने की दवाएं और खानपान में बदलाव की सलाह दे सकते हैं।
कुछ चुनिंदा मामलों में विशेष दवाओं से कोलेस्ट्रॉल स्टोन को घोलने की कोशिश की जाती है, हालांकि यह सभी मरीजों के लिए प्रभावी नहीं होती।
यदि बार-बार तेज दर्द, संक्रमण, पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस जैसी जटिलताएं हो जाएं, तो गॉल ब्लैडर निकालने की सर्जरी सबसे सामान्य और प्रभावी उपचार मानी जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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