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Ethiopia Volcano: दिल्ली-NCR पहुंची इथियोपिया के ज्वालामुखी की राख, क्या स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है इसका असर?

Tue, 25 Nov 2025 08:46 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ethiopia Volcanic Ash: इथियोपिया ज्वालामुखी की राख इस समय भारत से गुजर रही है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन इसको लेकर कई सवाल हैं, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है? आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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हैली गुबी ज्वालामुखी की राख - फोटो : Amar Ujala
Ethiopia Volcanic Ash India Health Impact: इथियोपिया में एक बहुत बड़ा ज्वालामुखी फटा है, जो लगभग 12,000 साल बाद हुआ है। इस विस्फोट से बहुत सारी राख निकली है। यह राख उड़ते-उड़ते कई देशों (यमन, ओमान) को पार करके अब भारत के ऊपर, खासकर दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसमान से गुजर रही है।

अच्छी बात यह है कि विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह राख बहुत ऊंचाई पर हवा में तैर रही है। इसलिए जमीन पर वायु गुणवत्ता सूचकांक के बिगड़ने की संभावना बहुत कम है। फिर भी यह एक अभूतपूर्व घटना है जिसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को जानना आवश्यक है। इस अप्रत्याशित पर्यावरणीय बदलाव के प्रति सतर्कता रहना और निगरानी रखना जरूरी है। आइए इस लेख में जानते हैं कि क्या इसका असर स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है?

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ज्वालामुखी विस्फोट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
राख की प्रकृति और जमीन पर प्रभाव
ज्वालामुखी की राख में आमतौर पर महीन सिलिका कण, सल्फर डाइऑक्साइड SO और अन्य खनिज शामिल होते हैं। हालांकि राख वर्तमान में वायुमंडल की ऊपरी परतों में तैर रही है, लेकिन अगर मौसम की स्थिति या वायु धाराएं इसे जमीन के नजदीक लाती हैं, तो यह खतरा पैदा कर सकती है। राख के कण यदि नीचे आते हैं, तो ये सामान्य वायु प्रदूषण की तरह काम करेंगे, जिससे सांस लेने में समस्या और आंखों में जलन हो सकती है।

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सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
सांस और फेफड़ों के लिए जोखिम
अगर राख के कण नीचे की वायुमंडलीय परतों में उतरते हैं, तो यह श्वसन स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। ये महीन कण सांस के माध्यम से फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं। इससे अस्थमा, सीओपीडी और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। स्वस्थ व्यक्तियों को भी खांसी, गले में खराश और सांस लेने में हल्की परेशानी महसूस हो सकती है।

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ज्वालामुखी में विस्फोट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
त्वचा और आंखों पर असर
ज्वालामुखी की राख त्वचा और आंखों के लिए भी जलन पैदा कर सकती है। अगर राख नीचे आती है, तो ये सिलिका कण आंखों में जलन की समस्या बढ़ सकती है और लालिमा का कारण बन सकती है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को खुजली या रैशेज की शिकायत हो सकती है। ऐसी स्थिति में, आंखों को साफ पानी से धोना और खुले में जाने से बचना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
 
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ज्वालामुखी विस्फोट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : फ्रीपिक
विशेषज्ञों की सलाह
चूंकि अभी राख बहुत ऊंचाई पर है, घबराने की जरूरत नहीं है। मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार शाम 7:30 बजे तक इसक प्रभाव रहेगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि आप आधिकारिक AQI रिपोर्ट पर कड़ी नजर रखें। साथ ही आपको राख की गंध या कण महसूस हों, तो N95 मास्क पहनें। खिड़कियां बंद रखें और घर के अंदर रहें। अस्थमा के मरीज अपनी दवाएं साथ रखें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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