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Emotional Over Eating: कहीं आपका बच्चा भी शिकार तो नहीं, बोरियत और तनाव है बड़ा कारण

Thu, 11 Jun 2020 01:57 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ओवरइटिंग से मोटापे की समस्या हो सकती है - फोटो : Pixabay
लॉकडाउन के कारण घरों में बच्चों की खाने-पीने, सोने से लेकर खेलने-पढ़ने की आदतों में बड़ा बदलाव आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे भले ही बता न पाएं लेकिन कोरोना काल का भय और तनाव उन में समा चुका है। इस तनाव के मारे वे पहले से ज्यादा भोजन करने लगे हैं। जिसे इमोशनल ओवरईटिंग नाम दिया गया है। विशेषज्ञों ने इससे बच्चों की सेहत और पोषण पर खतरे के आसार जताए हैं। बच्चों को इस समस्या से बचाने के लिए डॉक्टरों ने अभिभावकों से उनके खाने की आदतों पर नजर रखते हुए संतुलित आहार देने की अपील की है।
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ओवरइटिंग से मोटापे की समस्या हो सकती है - फोटो : Pixabay
नकारात्मकता या घबराहट भी वजह 
  • इमोशनल ओवर-ईटिंग के दो बड़े कारण होते हैं बोरियत और तनाव। बच्चों को इन दोनों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक अनुमान के हिसाब से किसी देश की आधी आबादी तनाव और अन्य कारणों से ओवर ईटिंग कर रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में बालरोग प्रोफेसर जूली लूमेंग का कहना है कि ओवरईटिंग, नकारात्मकता, घबराहट, गुस्सा और बोरियत का नतीजा है।
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ओवरइटिंग से मोटापे की समस्या हो सकती है - फोटो : Pixabay
बच्चों के मन का भय दूर करें
  • प्रो. लूमेंग का कहना है कि बच्चों में ओवर ईटिंग को लेकर कई सवाल हो सकते हैं। इस समस्या को अधिक करीब से देखने की जरूरत है। अगर वह महामारी के चलते ओवर-ईटिंग कर रहे हैं तो इसके पीछे वजह क्या है। क्या वह भावनात्मक रूप से कमजोर है घबराए हुए हैं अवसाद में हैं या फिर बोरियत महसूस कर रहे हैं। अगर ऐसी कोई वजह आपको दिखाई दे रही है। तो उसकी भावनाओं को समझें महामारी को लेकर उनके मन में बैठे और शंकाएं दूर करें।

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तनाव का असर बच्चों पर भी पड़ेगा - फोटो : Pixabay
घबराहट हावी न होने दे अभिभावक
  • अक्सर बच्चे अपने माता-पिता से ज्यादा सीखते हैं। अगर आपके चेहरे पर भी उन्हें तनाव और वह दिखेगा तो इसका असर बच्चों पर भी पड़ेगा। इसी प्रकार आप के खाने की आदतों से बच्चे भी प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोनाकाल में लोगों में घबराहट और भावनात्मक परिवर्तन आना लाजमी है। लेकिन इसे आप अपने व्यवहार पर हावी न होने दें।
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तनाव का असर बच्चों पर भी पड़ेगा - फोटो : Pixabay
माहौल और परवरिश का ज्यादा असर
  • ओवरईटिंग अनुवांशिक भी हो सकती है। लेकिन किशोरावस्था तक इसका बहुत असर नहीं होता। लिहाजा बच्चों में यह समस्या आसपास के माहौल और अभिभावकों की परिवल परवरिश के तरीके पर ज्यादा निर्भर करती है।
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उम्र के हिसाब से दे भोजन, ज्यादा स्नैक्स नहीं
  • न सिर्फ माता-पिता एक नियमित दिनचर्या का पालन करें। बल्कि बच्चों को भी इसकी आदत डालें। उनकी उम्र के हिसाब से उन्हें वक्त पर नाश्ता लंच डिनर और स्नैक्स दें। स्नैक्स दिन में एक अधिकतम दो बार ही दें।
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बच्चे (File Photo) - फोटो : social media
पढ़ाई या खेलकूद में व्यस्त रखें, लक्ष्य दे
  • बोरियत का समाधान व्यस्तता ही है। लिहाजा, बच्चों को किसी ना किसी पढ़ाई और खेलकूद की गतिविधि में व्यस्त रखें। हर गतिविधि में उनके लिए कोई न कोई लक्ष्य निर्धारित करें लक्ष्य हासिल करने पर बच्चों को ऊर्जा मिलेगी और सकारात्मकता आएगी।
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किशोरों में तेजी से मोटापे की समस्या देखने को मिल सकती है - फोटो : Pixabay
बच्चों का खानपान सुधारने का सही मौका
  • घर में जुबान पर काबू रखना जरूरी है। कहीं किशोरों में तेजी से मोटापे की समस्या देखने को मिल सकती है। हालांकि, बच्चों के दिन भर घर रहने से अभिभावक उनके खाने की आदतों पर नजर रख सकते हैं। भले ही वह कम खा रहे हो या ज्यादा।
(न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस)
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