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सांस की गंध से होगी इस कैंसर की पहचान, वैज्ञानिकों ने तैयार की ये खास इलेक्ट्रॉनिक नाक

Thu, 27 Feb 2020 10:27 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खाने की नली के कैंसर की पहचान अब जल्द संभव होगी। नीदरलैंड के रैडबाउड इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) से लैस विशेष तरह की इलेक्ट्रॉनिक नाक तैयार की है। इलेक्ट्रॉनिक नाक सांस की गंध पहचानकर पता कर लेगी कि संबंधित व्यक्ति को आहार नलिका का कैंसर है या नहीं। ये शोध हाल ही में एक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
 
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आहार नली एक्सरे - फोटो : फाइल फोटो
ब्रिटेन के चैरिटी कैंसर रिसर्च के अनुसार आहार नलिका के आसपास मौजूद कोशिकाएं अनियंत्रित हो जाती है जिसके कारण आहार नली में कैंसर होने की संभावना 11 फीसदी बढ़ जाती है। रैडबाउड इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ साइंसेज के प्रो. पीटर सियरसेमा का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक नोज (नाक) व्यक्ति की सांस से पांच मिनट में पता कर लेगी कि उसे आहार नलिका में कैंसर है या नहीं।  
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वैज्ञानिकों ने एआई युक्त इलेक्ट्रॉनिक नाक का अध्ययन 402 लोगों पर किया है। दो से तीन साल में ये तकनीक इस्तेमाल होगी। अभी कैंसर की पहचान के लिए इंडोस्कोपी की जाती है। ये प्रक्रिया जटिल होने के साथ काफी महंगी है।

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कैंसर
भारत के इन राज्यों में अधिक मामले
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एडवांस्ड मेडिकल एंड हेल्थ रिसर्च के अनुसार असम, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, जम्मू-कश्मीर में ऐसे कैंसर के मामले अधिक हैं। पंजाब, लुधियाना समेत अन्य राज्यों में भी बीड़ी, हुक्का का इस्तेमाल अधिक होने से इसके मामले सामने आने लगे हैं।
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कैंसर रोग - फोटो : Amar Ujala
फैक्ट फाइल: भारत में आहार नली का कैंसर
  • 42 हजार मौतें हर साल होती हैं। हर साल 47 हजार नए मामले आते हैं।
  • 6वां मौत का सबसे बड़ा कारण सभी तरह के कैंसर से होने वाली मौतोंं में।
  • 50 फीसदी से ज्यादा लोग लक्षणों को नहीं पहचान पाते हैं।
  • 25 सेमी. लंबी और 2 से 3 सेमी. चौड़ी होती है आहार नलिका। 
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