भारत में इबोला का खतरा
- फोटो : Amarujala.com/AI
भारत में कितना खतरा, कैसे रहें सुरक्षित?
डॉ स्वामीनाथन ने कहा, इबोला को लेकर रिसर्च-डेवलपमेंट और डायग्नोस्टिक्स, इलाज और टीके विकसित करने में भारत की एक बड़ी भूमिका है।
आईसीएमआर के माध्यम से, हम मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के त्वरित विकास में योगदान दे सकते हैं। महामारी की तैयारी के लिए हमें जो एक काम करने की जरूरत है, वह है अलग-अलग प्लेटफॉर्म का उपयोग करके प्रोटोटाइप टीके विकसित करना।
- स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जनता को जिस तरह की जानकारी दी जा रही है, उससे उन्हें यह भरोसा मिलना चाहिए कि यह ऐसी कोई चीज नहीं है जिसके बारे में तुरंत घबराना शुरू कर दिया जाए।
- हंतावायरस और इबोला के मामले में, भारत पर किसी भी तरह का कोई बड़ा खतरा नहीं है।
- हालांकि वैश्वीकरण और हवाई यात्रा के इस दौर में, हम हमेशा पूरी तरह आश्वस्त भी नहीं हो सकते। हमें तैयार रहने की जरूरत है।
डॉ सौम्या ने कहा, नए वायरस या जाने-पहचाने वायरस का संक्रमण हो, या फिर से उभरने वाले नए वायरस, इनका दौर चलता रहेगा। हमें समय रहते सुरक्षात्मक उपाय करने की जरूरत है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।