How To Eat Rice In Diabetes: भारतीय खान-पान की परंपरा में चावल केवल एक भोजन नहीं हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक अधिकांश घरों में थाली बिना चावल के अधूरी मानी जाती है। मगर जब बात एक डायबिटीज रोगी की आती है, तो यही सफेद चावल उनकी सेहत के लिए एक 'मीठा जहर' साबित हो सकती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक होता है, जिसका अर्थ है कि इसे खाते ही शरीर में ग्लूकोज का लेवल बिजली की गति से बढ़ने लगता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा तो बहुत अधिक होती है, लेकिन रिफाइनिंग प्रक्रिया के कारण फाइबर न के बराबर रह जाता है। इसकी वजह से यह पेट में बहुत जल्दी पच जाता है और खून में शुगर की मात्रा को अचानक अनियंत्रित कर देता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए यह लापरवाही इसलिए जानलेवा हो सकती है क्योंकि शुगर का लगातार बढ़ा रहना भविष्य में किडनी फेलियर, आंखों की रोशनी कम होने और हृदय रोगों के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आप चावल को हमेशा के लिए त्याग दें, बल्कि इसे खाने के वैज्ञानिक तरीके और सही मात्रा को समझना ज्यादा जरूरी है।