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Diabetes: डायबिटीज मरीजों को चावल खाने से क्या होता है? ये एक लापरवाही पड़ सकती है भारी

Sun, 15 Feb 2026 07:17 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rice For Diabetes Patients: अक्सर डायबिटीज के मरीजों को चावल खाने को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। एक सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिनका शुगर लेवल अधिक रहता है क्या उन्हें चावल खाना चाहिए? आइए इस लेख में इसी का जवाब जानते हैं।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
How To Eat Rice In Diabetes: भारतीय खान-पान की परंपरा में चावल केवल एक भोजन नहीं हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक अधिकांश घरों में थाली बिना चावल के अधूरी मानी जाती है। मगर जब बात एक डायबिटीज रोगी की आती है, तो यही सफेद चावल उनकी सेहत के लिए एक 'मीठा जहर' साबित हो सकती है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक होता है, जिसका अर्थ है कि इसे खाते ही शरीर में ग्लूकोज का लेवल बिजली की गति से बढ़ने लगता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा तो बहुत अधिक होती है, लेकिन रिफाइनिंग प्रक्रिया के कारण फाइबर न के बराबर रह जाता है। इसकी वजह से यह पेट में बहुत जल्दी पच जाता है और खून में शुगर की मात्रा को अचानक अनियंत्रित कर देता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए यह लापरवाही इसलिए जानलेवा हो सकती है क्योंकि शुगर का लगातार बढ़ा रहना भविष्य में किडनी फेलियर, आंखों की रोशनी कम होने और हृदय रोगों के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आप चावल को हमेशा के लिए त्याग दें, बल्कि इसे खाने के वैज्ञानिक तरीके और सही मात्रा को समझना ज्यादा जरूरी है।
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सफेद चावल खाना चाहिए या नहीं? - फोटो : freepik.com
सफेद चावल और ब्लड शुगर का संबंध
सफेद चावल पॉलिश किया हुआ होता है, जिससे इसके ऊपर की फाइबर वाली परत हट जाती है। बिना फाइबर के कार्बोहाइड्रेट सीधे शुगर में बदल जाता है। जब कोई डायबिटीज रोगी सफेद चावल खाता है, तो उसके शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे न सिर्फ शुगर बढ़ती है, बल्कि बार-बार भूख लगना और थकान जैसे लक्षण भी पैदा होते हैं।

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व्हाइट राइस या ब्राउन राइस में कौन है बेहतर? - फोटो : freepik.com
चावल खाने का सही तरीका और विकल्प
अगर आप चावल के बिना नहीं रह सकते, तो सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या लाल चावल का चुनाव करें।  इनमें फाइबर अधिक होता है जो शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है। इसके अलावा चावल को हमेशा खूब सारी हरी सब्जियों और दाल के साथ मिलाकर खाएं। इससे भोजन का संपूर्ण ग्लाइसेमिक लोड कम हो जाता है और शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता।

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चावल पकाने का तरीका भी जरूरी - फोटो : freepik.com
पकाने की विधि है महत्वपूर्ण
डायबिटीज में चावल की 'क्वांटिटी' सबसे ज्यादा मायने रखती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि एक बार में एक छोटी कटोरी से ज्यादा चावल न लें।  साथ ही चावल को 'प्रेशर कुकर' के बजाय खुले बर्तन में मांड निकालकर पकाएं। पके हुए चावल को ठंडा करके खाने से भी इसका 'रेसिस्टेंट स्टार्च' बढ़ जाता है, जो शुगर कंट्रोल में मदद करता है।
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चावल - फोटो : Adobe stock
क्या करें?
डायबिटीज एक 'मैनेजमेंट' वाली बीमारी है। चावल खाने में थोड़ी सी भी लापरवाही आपके अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही डाइट चार्ट का पालन करें। ध्यान रखें स्वाद से ज्यादा आपकी सेहत की सुरक्षा जरूरी है। सही चुनाव और सीमित मात्रा ही आपको इस बीमारी के खतरों से बचाकर एक एक्टिव और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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