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सेहत की बात: उम्र बढ़ने की समस्याओं जैसे लग सकते हैं किडनी की बीमारी के ये लक्षण, न करें इग्नोर

Thu, 27 Aug 2026 06:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किडनी की बीमारी शुरुआती दौर में अक्सर बिना लक्षण के रहती है। लगातार कमजोरी, सूजन, पेशाब में बदलाव, भूख कम होना, मितली या सांस फूलना कुछ संकेत हो सकते हैं, लेकिन इनके कई दूसरे कारण भी हैं। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वालों को नियमित किडनी जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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Kidney Damage Signs - फोटो : Amarujala.com/AI
लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने कई तरह की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। कम उम्र में ही लोग शुगर-बीपी का शिकार हो रहे हैं, जिसका असर शरीर के जरूरी अंगों पर भी पड़ता देखा जा रहा है। यही कारण है कि युवा आबादी तेजी से किडनी की समस्याओं का शिकार होती जा रही है।

किडनी बिना थके लगातार काम करती रहती है। खून से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल को फिल्टर करने के लिए किडनी का सही तरीके से काम करते रहना जरूरी है। किडनी की कार्यक्षमता घटने पर शरीर में अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट जमा हो सकते हैं। इससे आगे चलकर सूजन, सांस फूलने, भूख कम लगने, मितली-उल्टी और कमजोरी जैसे दूसरे स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा रहता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी की बीमारियां अक्सर बहुत साइलेंटली बढ़ती हैं। बहुत से लोगों में किडनी की समस्याओं का तब पता चलता है जब समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। किडनी की समस्याओं को अक्सर उम्र बढ़ने, ज्यादा काम, नींद की कमी या सामान्य कमजोरी समझ लिया जाता है। ये लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है।
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थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी स्वस्थ रहे और आपको इससे संबंधित कोई दिक्कत न हो इसके लिए लाइफस्टाइल और खान-पान दोनों पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। किडनी की बीमारी का खतरा डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों में ज्यादा होता है। ऐसे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। अगर शरीर में कुछ असामान्य लक्षण दिख रहे हैं, तो इसे अनदेखा न करें।

लगातार थकान और कमजोरी

किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में अपशिष्ट जमा होने लगते हैं। कई लोगों में किडनी की बीमारी से एनीमिया भी हो सकता है। लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन में कमी के कारण थकान और कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। यही वजह है कि लंबे समय से बनी कमजोरी को सिर्फ उम्र की समस्या समझकर टालना ठीक नहीं। 
 
  • थकान के वैसे कई अन्य कारण हो सकते हैं  लेकिन लगातार कमजोरी के साथ डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर हो तो किडनी की जांच जरूर करा लें।
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पैरों में सूजन और दर्द - फोटो : Adobe Stock
पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन दिखना

किडनी शरीर से अतिरिक्त तरल निकालने में मदद करती है। जब उसकी कार्यक्षमता कम होती है तो शरीर में तरल जमा हो सकता है। इससे पैरों में सूजन और कुछ मामलों में सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है।
 
  • अगर चेहरे पर या पैरों-टखनों पर बार-बार सूजन दिखाई दे तो इसे केवल ज्यादा देर खड़े रहने या शारीरिक मेहनत का नतीजा मानकर अनदेखा न करें।
  • कई बार ये सूजन दिल, लिवर या दूसरी स्थितियों में भी हो सकती है, इसलिए कारण की जांच जरूरी है।

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पेशाब की समस्या - फोटो : Freepik.com
पेशाब में बदलाव

किडनी की बीमारी में पेशाब से जुड़े बदलाव महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं, हालांकि हर बदलाव किडनी की बीमारी हो ये भी जरूरी नहीं है। बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार पेशाब के लिए उठना या पेशाब में असामान्य बदलाव कई अलग कारणों से हो सकते हैं।
 
  • शुरुआत में किडनी की बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद हो सकती है। इसलिए केवल पेशाब सामान्य दिखने किडनी को हेल्दी मान लेना सही नहीं है। अगर पेशाब में लगातार बदलाव दिख रहा है और साथ में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
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किडनी की बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
इन समस्याओं पर भी दें ध्यान
 
  • किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में अपशिष्ट जमा होने लगते हैं। इससे भूख कम होने और मितली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है। इससे पैरों में सूजन के साथ कुछ लोगों में सांस फूलने की समस्या हो सकती है।
  • किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआती चरण में लक्षण नहीं भी हो सकते हैं। इसलिए केवल शरीर के संकेतों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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