लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने कई तरह की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। कम उम्र में ही लोग शुगर-बीपी का शिकार हो रहे हैं, जिसका असर शरीर के जरूरी अंगों पर भी पड़ता देखा जा रहा है। यही कारण है कि युवा आबादी तेजी से किडनी की समस्याओं का शिकार होती जा रही है।
किडनी बिना थके लगातार काम करती रहती है। खून से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल को फिल्टर करने के लिए किडनी का सही तरीके से काम करते रहना जरूरी है। किडनी की कार्यक्षमता घटने पर शरीर में अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट जमा हो सकते हैं। इससे आगे चलकर सूजन, सांस फूलने, भूख कम लगने, मितली-उल्टी और कमजोरी जैसे दूसरे स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी की बीमारियां अक्सर बहुत साइलेंटली बढ़ती हैं। बहुत से लोगों में किडनी की समस्याओं का तब पता चलता है जब समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। किडनी की समस्याओं को अक्सर उम्र बढ़ने, ज्यादा काम, नींद की कमी या सामान्य कमजोरी समझ लिया जाता है। ये लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है।