कैंसर के पता लगाने वाली जांच
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कैसे काम करता है ये टेस्ट?
अब तक 700 से अधिक मरीजों पर दो साल तक चले एक अध्ययन में इसका परीक्षण किया गया है जिसके परिणाम आशाजनक रहे थे।
वैज्ञानिक बताते हैं, यह परीक्षण सांस में मौजूद 'वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों' के संयोजन का पता लगाता है। इनमें से हजारों यौगिक रक्तप्रवाह में घूमते हैं और जब रक्त फेफड़ों में पहुंचता है तो छनकर सांस के साथ बाहर निकल जाते हैं। दावा किया जा रहा है कि अग्नाशय कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में भी इससे मदद मिल सकती है।
अभी तक जिन लोगों में अग्नाशय कैंसर का संदेह होता है उन्हें स्कैन के लिए रेफर किया जाता है। इंपीरियल कॉलेज लंदन में सर्जरी और कैंसर विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर जॉर्ज हैना कहते हैं, 'यदि श्वास परीक्षण अध्ययन मान्य किया जा सकता है, तो इसमें अग्नाशय कैंसर के रोगियों की समय रहते पहचान करने में काफी मदद मिलने की संभावना है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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