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सेहत की बात: हड्डियों को कमजोर तो नहीं कर रही है कॉफी? आप भी पीते हैं तो जरूर जान लीजिए ये बातें

Thu, 03 Sep 2026 05:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन में करीब 10 हजार महिलाओं पर 10 साल तक नजर रखी गई। रोजाना पांच कप से ज्यादा कॉफी पीने वाली महिलाओं में हड्डियों का खनिज घनत्व कम पाया गया, जबकि चाय पीने वाली महिलाओं में कूल्हे की हड्डियों का घनत्व थोड़ा बेहतर था।
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कॉफी से हड्डियां हो रही हैं कमजोर? - फोटो : Amarujala.com/AI
दिन की शुरुआत एक कप कॉफी से करना कई लोगों की आदत होती है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ कॉफी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि रोजाना पांच कप से ज्यादा कॉफी पीने वाली बुजुर्ग महिलाओं में हड्डियों का खनिज घनत्व कम पाया गया। दूसरी ओर, चाय पीने वाली महिलाओं में कूल्हे की हड्डियों का घनत्व थोड़ा बेहतर देखा गया।

ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में करीब 10 हजार महिलाओं के स्वास्थ्य पर लगभग 10 वर्षों तक नजर रखी। अध्ययन के नतीजे न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि लंबे समय तक कॉफी और चाय पीने का हड्डियों के स्वास्थ्य पर क्या संबंध हो सकता है?

अध्ययन में पाया गया कि रोजाना दो से तीन कप कॉफी पीने वाली महिलाओं में हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर कोई स्पष्ट नुकसान नहीं दिखा। हालांकि, जब कॉफी की मात्रा रोजाना पांच कप से अधिक हुई, तो महिलाओं में अस्थि खनिज घनत्व कम पाया गया।
 
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हड्डियों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
चाय पीने वाली महिलाओं में हड्डियों का घनत्व थोड़ा बेहतर

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने खास तौर पर कूल्हे और जांघ के ऊपरी हिस्से की हड्डियों के घनत्व का आकलन किया। उम्र बढ़ने के साथ इन हड्डियों का कमजोर होना फ्रैक्चर के खतरे को बढ़ा सकता है।
 
  • ऑस्टियोपोरोसिस भी बुजुर्गों, खासकर महिलाओं के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र की करीब हर तीन में से एक महिला इसके जोखिम से प्रभावित मानी जाती है।
  • कॉफी के मुकाबले चाय का असर कुछ अलग नजर आया।
  • अध्ययन में नियमित रूप से चाय पीने वाली महिलाओं के कुल कूल्हे की हड्डियों का खनिज घनत्व उन महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक था, जो चाय नहीं पीती थीं। हालांकि यह अंतर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन शोध के आंकड़ों में यह महत्वपूर्ण पाया गया।

शोधकर्ताओं का मानना है कि चाय में मौजूद कैटेचिन जैसे प्राकृतिक यौगिक हड्डियों के स्वास्थ्य में भूमिका निभा सकते हैं। ये तत्व हड्डियों के निर्माण में मदद करने और हड्डियों के क्षरण की प्रक्रिया को धीमा करने में योगदान दे सकते हैं।
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शराब-धूम्रपान से होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com
ज्यादा शराब के सेवन के साथ कॉफी का संबंध अधिक मजबूत

अध्ययन में एक और दिलचस्प बात सामने आई। कॉफी और लो बोन डेंसिटी के बीच संबंध हर महिला में एक जैसा नहीं था। जिन महिलाओं ने जीवनभर अधिक मात्रा में शराब का सेवन किया था, उनमें ज्यादा कॉफी पीने और लो बोन डेंसिटी के बीच संबंध अधिक मजबूत दिखाई दिया।
 
  • वहीं, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में चाय पीने और बेहतर हड्डी घनत्व के बीच सकारात्मक संबंध अपेक्षाकृत ज्यादा स्पष्ट था।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों के चयापचय को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका प्रभाव छोटा हो सकता है।
  • कॉफी में दूध शामिल करने से कैल्शियम की कुछ भरपाई भी हो सकती है।
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कॉफी पीने के फायदे और नुकसान - फोटो : Freepik.comAl
क्या कॉफी पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए?

अध्ययन के नतीजों का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि महिलाओं को कॉफी पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए या ज्यादा मात्रा में चाय पीना शुरू कर देना चाहिए। सामान्य मात्रा में कॉफी पीने से अध्ययन में कोई स्पष्ट नुकसान नहीं मिला।
 
  • हड्डियों को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन-डी का सेवन अब भी सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि यह अध्ययन कॉफी-चाय के सेवन और हड्डियों के घनत्व के बीच संबंध बताता है।
  • इससे यह साबित नहीं होता कि कॉफी सीधे तौर पर हड्डियों को कमजोर करती है या चाय सीधे हड्डियों को मजबूत बनाती है।



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स्रोत:
Tea linked to stronger bones in older women


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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