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Double Vision: अचानक सब कुछ दिखने लगा है डबल, आपको डिप्लोपिया तो नहीं हो गया? जानिए क्या है आंखों की ये समस्या

Thu, 26 Mar 2026 08:13 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डबल विजन या दो-दो दिखना आमतौर पर एक अस्थायी समस्या होती है, जब भी आपको अपनी दृष्टि में कोई बदलाव नजर आए, तो तुरंत अपनी आंखों की जांच करवाना बहुत जरूरी है।
 
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आंखों की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com
आंखों से संबंधित समस्याओं के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इसका खतरा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आंखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं, ये काफी संवेदनशील भी होती हैं। मसलन आंखों को स्वस्थ रखने के लिए हमें अतिरिक्त सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।

हालांकि जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, आंखों से संबंधित समस्याओं के मामले भी काफी बढ़ गए हैं।
 
कम दिखाई देना, मोतियाबिंद-ग्लूकोमा की समस्या के बारे में तो अक्सर बात की जाती रही है, पर क्या आप डबल विजन की समस्या के बारे में जानते हैं? डबल विजन को मेडिकल की भाषा में डिप्लोपिया कहा जाता है। अगर आपको भी कोई एक चीज दो-दो दिख रही है तो सावधान हो जाइए, ये  डबल विजन की समस्या हो सकती है।
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आंखों से संबंधित समस्याओं का कारण - फोटो : Freepik
डबल विजन के बारे में जानिए 

डबल विजन या दोहरी दृष्टि का मतलब चीजों का दो-दो दिखना है। इसमें आप जिस एक चीज को देख रहे हैं, उसकी दो तस्वीरें दिखाई देती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दोहरी दृष्टि आमतौर पर एक अस्थायी समस्या होती है, लेकिन यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकती है। इस समस्या के कारण ड्राइव करना या चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है। 

डॉक्टर बताते हैं, आंखों की मांसपेशियों की कमजोरी, नसों में समस्या, थायरॉइड, स्ट्रोक और ब्रेन ट्यूमर के कारण डबल विजन की दिक्कत हो सकती है। इसलिए इसके कारणों को समझना और इलाज कराना जरूरी हो जाता है।
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आंखों से दो-दो दिखने की समस्या - फोटो : Freepik.com
डबल विजन में क्या दिक्कतें होती हैं?

जैसा कि नाम से पता चलता है डबल विजन का मतलब किसी वस्तु का दो दिखाई देना। इसके अलावा आपको डबल विजन के कारण सिरदर्द, आंखों में दर्द, चक्कर आने, शरीर का संतुलन बिगड़ने में कठिनाई हो सकती है। डबल विजन वालों के लिए पढ़ने या गाड़ी चलानें में कठिनाई के साथ रोशनी से परेशानी होती है। 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 60 की उम्र के बाद लोगों में डबल विजन होने का खतरा बढ़ जाता है, वहीं कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के शिकार लोगों में भी इसका जोखिम बढ़ जाता है।


क्यों होती है ये समस्या?

आंखों की कई समस्याओं के कारण आपको डिप्लोपिया या दोहरी दृष्टि की समस्या हो सकती है। कोई भी ऐसी चीज जो आपके दिमाग, आपकी आंखों या उन्हें नियंत्रित करने वाली नसों और मांसपेशियों पर असर डालती है, उससे डिप्लोपिया की दिक्कत बढ़ जाती है।
  • निकट-दृष्टि दोष (मायोपिया), दूर-दृष्टि दोष (हाइपरोपिया) के शिकार लोगों में ये समस्या अधिक देखी जाती है।
  • मोतियाबिंद और ड्राई आई सिंड्रोम वालों में भी इसका जोखिम रहता है।
  • माइग्रेन वाले लोगों में भी डिप्लोपिया का खतरा अधिक होता है।
  • जिन लोगों को सिर में चोट लगी है उनमें भी  दोहरी दृष्टि की दिक्कत हो सकती है।

कुछ खास न्यूरोलॉजिकल या अन्य स्वास्थ्य समस्याओ जैसे ब्रेन एन्यूरिज्म, स्ट्रोक, डायबिटीज, विटामिन बी1 की कमी, थायरॉइड के मरीजों में खतरा अधिक होता है।
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आंखों की नियमित जांच जरूर कराएं - फोटो : Freepik.com
डबल विजन हो जाए तो क्या करें और कैसे बचें?

डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको डबल विजन है तो इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपको समस्या किस वजह से है? कुछ लोगों को सिर्फ चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से लाभ मिल सकता है। अगर आंखों की मांसपेशियां कमजोर होने की वजह से ऐसा हो रहा है तो सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

डॉक्टर कहते हैं, इस समस्या से बचने को कोई तरीका मौजूद नहीं है हालांकि कुछ सावधानियां आपके जोखिमों को कम कर सकती हैं। इसके लिए धूम्रपान न करें, इससे आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। स्क्रीन टाइम कम करें ताकि आंखों को थोड़ा आराम मिल सके। आंखों को चोट से बचाने के लिए खेलते समय सुरक्षात्मक चश्मे या गॉगल्स पहनें। साल में कम से कम  एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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