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Morning Walk: क्या सुबह नंगे पांव घास पर टहलने से आंखों की रोशनी बढ़ती है? जान लें हकीकत

Sat, 14 Feb 2026 02:52 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Benefits Of Earthing For Stress: हमारे समाज में एक भ्रांति फैली हुई है कि सुबह में नंगे पैर घास पर चलने से आंख की रोशनी बढ़ती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक घास पर नंगे पांव चलने से आंखों के रोशनी पर सीधे कोई फर्क नहीं पड़ता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।  
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घास पर पैदल चलना - फोटो : Adobe
Walking Barefoot On Grass Benefits: हमारे देश में यह बात पीढ़ियों से कही जाती रही है कि सुबह की ओस वाली घास पर नंगे पैर चलने से आंखों की रोशनी तेज होती है। लेकिन क्या यह वैज्ञानिक रूप से सच है? चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के अनुसार, सुबह घास पर नंगे पैर चलने से आंखों की रोशनी सीधे तौर पर नहीं बढ़ती है और न ही यह चश्मे के नंबर या 'रिफ्रैक्टिव एरर' (जैसे मायोपिया या हाइपरोपिया) को ठीक कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह अभ्यास बेकार है। 

दरअसल रोज सुबह में नंगे पैर घास पर टहलने से आंखों के साथ संपूर्ण स्वास्थ्य को 'अप्रत्यक्ष' रूप से सहारा देता है। जब हम प्रकृति के करीब समय बिताते हैं और नंगे पैर चलते हैं, तो यह शरीर के तनाव के लेवल को कम करता है और आंखों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। आज के डिजिटल युग में जहां हम घंटों स्क्रीन के सामने बिताते हैं, यह नेचुरल ब्रेक आंखों की थकान को दूर करने में एक थेरेपी की तरह काम करता है, जो लंबे समय में आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने में मददगार हो सकता है।
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आंखें - फोटो : Freepik.com
तनाव और आंखों के बीच का कनेक्शन
वैज्ञानिक रूप से, अत्यधिक मानसिक तनाव और 'कोर्टिसोल' हार्मोन का बढ़ना आंखों की नसों पर दबाव डालता है, जिससे धुंधलापन महसूस हो सकता है। घास पर टहलने से शरीर का 'पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम' सक्रिय होता है, जो मांसपेशियों को रिलैक्स करता है। जब आपका दिमाग शांत होता है, तो आंखों की फोकस करने वाली मांसपेशियों पर पड़ने वाला खिंचाव कम हो जाता है, जिससे डिजिटल आई स्ट्रेन से तुरंत राहत मिलती है।

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फॉरेस्ट बाथिंग - फोटो : Adobe Stock
फुट रिफ्लेक्सोलॉजी
एक्यूप्रेशर के सिद्धांतों के अनुसार पैरों के तलवों में कुछ विशेष बिंदु होते हैं जो तंत्रिका तंत्र से जुड़े होते हैं। घास की कोमलता और असमान सतह पर चलने से इन बिंदुओं पर हल्का दबाव पड़ता है, जो ब्लड सर्कुलेशन में सुधार कर सकता है। हालांकि यह दृष्टि दोष को जड़ से खत्म नहीं करता, लेकिन यह आंखों को ताजगी और सुकून देने वाली एक सहायक प्रक्रिया के रूप में काम करती है।

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सुबह में टहलने - फोटो : AI Generated
अर्थिंग के लाभ
हरा रंग की घास आंखों के रेटिना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। साथ ही जमीन के सीधे संपर्क में आने से होने वाली 'अर्थिंग' शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करती है। यह अप्रत्यक्ष लाभ आंखों की कोशिकाओं को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। सुबह की ताजी ऑक्सीजन और प्राकृतिक रोशनी विटामिन-D के लेवल को भी संतुलित करती है, जो समग्र नेत्र स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।
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आंखों की बीमारी - फोटो : Freepik.com
चश्मे का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक है
सुबह घास पर टहलना एक बेहतरीन जीवनशैली की आदत है, लेकिन इसे आंखों के इलाज या चश्मे के विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए।  दृष्टि दोष होने पर डॉक्टर से परामर्श और चश्मा पहनना ही सही उपचार है। नेचर के साथ बिताया गया यह समय आपकी आंखों को आराम देने, तनाव घटाने और आपको मानसिक रूप से सक्रिय रखने का एक माध्यम मात्र है। स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के साथ इसे अपनाकर आप अपनी आंखों की चमक बरकरार रख सकते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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