स्ट्रेस से इमोशनल ईटिंग
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स्ट्रेस के कारण बढ़ जाता है इमोशनल ईटिंग
इमोशनल ईटिंग को स्ट्रेस ईटिंग भी कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तनाव, गुस्सा, डर, बोरियत, उदासी और अकेलेपन जैसी नेगेटिव भावनाओं को दबाने या शांत करने के लिए लोग अधिक खाने लगते हैं। जिंदगी की बड़ी घटनाएं या रोजमर्रा की परेशानियां नेगेटिव भावनाओं को ट्रिगर कर सकती हैं, जिससे इमोशनल ईटिंग होती है।
- साइकोलॉजिकल अध्ययनों के अनुसार, इमोशनल ईटिंग में दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम एक्टिव हो जाता है।
- मीठा या जंक फूड खाने से दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है, जिससे थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस होता है। यही वजह है कि व्यक्ति बार-बार इस तरह की चीजें खाने लगता है।
- आमतौर पर इमोशनल ईटिंग में खाई जाने वाली ज्यादातर चीजें हाई कैलोरी वाली होती हैं, जिसके कारण तेजी से वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है।