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Health Alert: गट और हार्ट हेल्थ का गहरा कनेक्शन, पेट की बीमारियां कहीं हार्ट अटैक का न बन जाएं कारण

Tue, 04 Nov 2025 07:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गट हेल्थ की गड़बड़ी हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकती है। यानी अगर आपको भी अक्सर पाचन से संबंधित दिक्कतें बनी रहती हैं तो सावधान हो जाइए, इससे हृदय रोगों का भी खतरा हो सकता है।
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हार्ट अटैक और हृदय रोगों का खतरा - फोटो : adobe stock images
हृदय रोगों को दुनियाभर में मृत्य का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। हर साल इसके कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ गड़बड़ लाइफस्टाइल, खान-पान से संबंधित समस्याओं, पर्यावरणीय परिस्थितियों को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं। कुछ दशकों पहले तक हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के रूप में जाना जाता था हालांकि अब कम उम्र के लोग, यहां तक कि बच्चे भी हार्ट की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर के सभी अंग एक दूसरे से कनेक्टेड होते हैं? किसी अंग में होने वाली समस्या का असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे ही हमारा गट और हार्ट हेल्थ भी एक दूसरे से जुड़ा हुआ होता है।  

अध्ययन में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गट हेल्थ की गड़बड़ी हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकती है। यानी अगर आपको भी अक्सर पाचन से संबंधित दिक्कतें बनी रहती हैं तो सावधान हो जाइए, इससे हृदय रोगों का भी खतरा हो सकता है।
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आंतों और हृदय के बीच कनेक्शन - फोटो : Freepik.com
गट-हार्ट हेल्थ का कनेक्शन

आंतों को शरीर का दूसरा ब्रेन कहा जाता है, आंतों और मस्तिष्क के बीच कनेक्शन को लेकर अक्सर चर्चा की जाती रही है। 'गट फीलिंग' होना भी इसी संबंध से जुड़ा है। पर क्या आप जानते हैं कि आंतें हमारे हृदय स्वास्थ्य को भी प्रभावित करने वाली हो सकती हैं?

हमारी आंत में लगभग 100 ट्रिलियन सूक्ष्म जीवाणु रहते हैं जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये बैक्टीरिया पाचन, इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। जब ये बैक्टीरिया संतुलित रहते हैं, तो शरीर स्वस्थ रहता है, लेकिन इनका असंतुलन कई बीमारियों को जन्म दे सकता है।

अध्ययनों में पाया गया है कि गट माइक्रोबायोम में गड़बड़ी हृदय स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। असंतुलित गट बैक्टीरिया के कारण हृदय रोग और यहां तक कि हार्ट अटैक का भी खतरा हो सकता है।
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आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों का स्वस्थ रहना जरूरी - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. स्टेनली शॉ कहते हैं, हमारी आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों और हमारे शरीर की अधिकांश प्रणालियों जैसे तंत्रिका और प्रतिरक्षा प्रणालियों का सीधा संबंध होता है। ये सभी हृदय स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं। चूंकि हमारा आहार आंत के माइक्रोबायोटा की संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए हम जिस तरह की चीजों को आहार में शामिल करते हैं उसका हृदय स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।

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गट और हार्ट हेल्थ का लिंक - फोटो : Adobe Stock
इस कनेक्शन को जानिए

जब हम कोलीन वाली चीजें जैसे रेड मीट, मछली, चिकन आदि खाते हैं तो कुछ स्थितियों में इनके मेटाबॉलिज्म के दौरान ट्राइमेथिलैमाइन बनता है जो लिवर में ट्राइमेथिलैमाइन एन-ऑक्साइड (TMAO) में परिवर्तित हो जाता है। इसकी अधिकता धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है, जिससे हृदय रोगों का खतरा रहता है। 

अध्ययन बताते हैं कि जिन लोगों के रक्त में TMAO का स्तर अधिक होता है, उनमें दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की आशंका अधिक होती है। चूंकि रेड मीट टीएमए का एक मुख्य स्रोत है, इसलिए इसका सेवन कम करने से आंत को बहुत अधिक टीएमएओ बनाने से रोका जा सकता है।
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हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाने वाली स्थितियां - फोटो : Adobe stock photos
अल्सरेटिव कोलाइटिस और हृदय रोगों का खतरा

अल्सरेटिव कोलाइटिस, इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) का ही एक प्रकार है। यह स्थिति बड़ी आंत और मलाशय की सबसे भीतरी परत में होती है, जिससे आपके पाचन तंत्र के अंदर घाव हो जाते हैं। अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले रोगियों को न केवल आईबीडी से संबंधित पाचन समस्याओं की समस्या होती है साथ ही अध्ययनों से पचा चलता है कि उन्हें हृदय रोग का भी अधिक खतरा हो सकता है।

नीदरलैंड के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पाया कि आईबीडी की समस्या को सिर्फ पेट की दिक्कत मानने की गलती नहीं करनी चाहिए, ये हृदय संबंधी समस्याओं के खतरे को भी बढ़ा देती है।



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स्रोत
Healthy gut, healthy heart


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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