Long Sitting Health Effects: इस लेख में जानेंगे कि लंबे समय तक बैठे रहने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है, ब्रेन फॉग क्यों होता है और इससे बचने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए।
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क्या लंबे समय तक बैठे रहने से दिमाग पर भी पड़ता है असर?
- फोटो : AI
Long Sitting Health Effects: आज की डेस्क जॉब, घंटों स्क्रीन टाइम, लंबा सफर और खाली समय में सोफे पर बैठे रहने की आदत ने हमारी रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधियों को काफी कम कर दिया है। लेकिन क्या लगातार बैठे रहने का असर सिर्फ शरीर तक सीमित है, या इससे दिमाग की सेहत भी प्रभावित हो सकती है?
इस लेख में जानेंगे कि लंबे समय तक बैठे रहने से ब्रेन हेल्थ पर क्या असर पड़ सकता है, ब्रेन फॉग और मानसिक थकान के पीछे कौन से कारण हो सकते हैं और दिनभर की निष्क्रियता को कम करने के लिए किन आसान उपायों को अपनाया जा सकता है।
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लंबे समय तक बैठने से दिमाग पर क्या असर पड़ सकता है?
डॉ. कुणाल बहरानी, चेयरमैन एवं ग्रुप डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के अनुसार, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वाली जीवनशैली शरीर के मेटाबॉलिक और कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और खराब ब्लड सर्कुलेशन जैसे फैक्टर लंबे समय में ब्रेन हेल्थ के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कुछ शोधों में लंबे समय तक बैठे रहने और खराब कॉग्निटिव हेल्थ के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि ज्यादा देर बैठने वाला हर व्यक्ति याददाश्त की समस्या या डिमेंशिया का शिकार होगा। चिंता मुख्य रूप से लगातार निष्क्रिय रहने वाली जीवनशैली को लेकर है।
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सिर्फ 30-45 मिनट की एक्सरसाइज काफी है?
शाम को जिम में 30-45 मिनट वर्कआउट करना निश्चित रूप से फायदेमंद है, लेकिन पूरे दिन की निष्क्रियता को पूरी तरह खत्म करने के लिए इसे अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
डॉ. कुणाल बहरानी के मुताबिक, दिनभर में छोटे-छोटे एक्टिविटी ब्रेक शामिल करना बेहतर आदत हो सकती है। फोन पर बात करते समय चलना, मीटिंग के बीच उठना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और लंच के बाद कुछ मिनट टहलना आसान तरीके हैं।
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क्या लंबे समय तक बैठने से Brain Fog होता है?
डेस्क पर लंबे समय तक काम करने के बाद ध्यान लगाने में परेशानी या मानसिक थकान महसूस हो सकती है। इसे कई लोग “ब्रेन फॉग” कहते हैं। हालांकि, इसका कारण सिर्फ बैठना नहीं होता। लगातार स्क्रीन देखना, कम पानी पीना, खाना छोड़ना, मानसिक तनाव और नींद की कमी भी एकाग्रता प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में कुछ मिनट उठकर चलना, पानी पीना और स्क्रीन से ब्रेक लेना मददगार आदत हो सकती है।
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डॉक्टर की सलाह: कुर्सी से कब उठें?
बैठने के कुल घंटों की गिनती करने के बजाय यह देखना ज्यादा आसान है कि आप आखिरी बार कब अपनी कुर्सी से उठे थे। अगर कई घंटे बीत चुके हैं, तो उठकर कुछ मिनट चलना या स्ट्रेच करना चाहिए। ब्रेन हेल्थ के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।
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याद रखें ये बात
बैठना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है, लेकिन लगातार कई घंटों तक बिना ब्रेक बैठे रहना और पूरे दिन बहुत कम शारीरिक गतिविधि करना अच्छी आदत नहीं है। इसलिए दिमाग की देखभाल के लिए किसी बड़े बदलाव का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। काम के बीच उठना, कुछ मिनट चलना और शरीर को सक्रिय रखना एक छोटा लेकिन उपयोगी कदम हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।