कफ सिरप बिक्री पर सख्ती
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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
- अमर उजाला से बातचीत में ग्रेटर नोएडा स्थित एक निजी अस्पताल में एमडी, इंटरनल मेडिसिन डॉ श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं,
''मैं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के इस फैसले का स्वागत करता हूं, जिसमें कफ सिरप को 'शेड्यूल-के' से हटा लिया गया है। इन दवाओं के लिए अब डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होगा। इससे लोग बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेने से बचेंगे और दवाओं का सही व सुरक्षित इस्तेमाल बढ़ेगा। यह फैसला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्य प्रदेश और राजस्थान से ऐसी खबरें सामने आई थीं जिसमें दूषित कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी। जांच में पाया गया कि इन सिरपों में 48.6% डायइथिलीन ग्लाइकोल (DEG) मिला था, जबकि इसकी सुरक्षित सीमा केवल 0.1% है। इसी तरह के मामलों में गाम्बिया में 70 और उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की जान जा चुकी है। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने और दवाओं की गुणवत्ता व नियमन को मजबूत करने की दिशा में यह सरकार का एक सराहनीय और स्वागतयोग्य कदम है।''
- हैदराबाद में बच्चों की डॉक्टर, शिवरंजनी संतोष ने इस फैसले का स्वागत करते हुए सरकार का शुक्रिया अदा किया।
''सरकार के इस फैसले की मैं तारीफ करती हूं। इससे कई बच्चों की जान बच सकती है। यह एक बहुत जरूरी कदम है जिसकी जरूरत बहुत पहले से ही थी। यह जन-स्वास्थ्य के लिए एक अहम कदम है। लंबे समय से खांसी-ज़ुकाम की दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के आसानी से मिल रही हैं, जिससे लोग बिना सही डॉक्टरी सलाह के इनका इस्तेमाल कर रहे थे। इससे दवाओं का न सिर्फ गलत इस्तेमाल हुआ बल्कि सेहत से जुड़े ऐसे जोखिम पैदा हुए जिनसे बचा जा सकता था। नए नियम से लोगों को बेवजह अस्पताल में भर्ती होने से बचाने में मदद मिलेगी और माता-पिता बच्चों को ऐसी दवाएं देने से पहले सही डॉक्टरी सलाह लेने के लिए प्रेरित होंगे।''