थकान
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निदान और उपचार
क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का निदान चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसे पहचानने के लिए कोई विशिष्ट टेस्ट मौजूद नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर मरीज़ के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ही इसका निदान करते हैं।
इसके उपचार में मुख्य रूप से लक्षणों का प्रबंधन शामिल है। इसमें नियमित नींद, संतुलित आहार, और हल्के व्यायाम जैसी जीवनशैली में बदलाव शामिल होते हैं। इसके साथ ही, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और ग्रेडेड एक्सरसाइज थेरेपी (GET) भी इस स्थिति में काफी प्रभावी मानी जाती हैं। मेडिटेशन और प्राणायाम जैसी पद्धतियाँ तनाव को कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होती हैं, जो क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।