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Health Tips: क्या आपको भी अक्सर रहती है थकान के साथ भूलने की बीमारी? कहीं ये क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम तो नहीं!

Sat, 21 Jun 2025 03:39 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अक्सर कुछ लोगों को थकान के साथ भूलने की बीमारी होती है। अगर ये थकान लंबे समय से है और सामान्य स्थितियों में भी आपको परेशान कर रहा है तो यह क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं। इसके बारे में हमारे में बहुत कम बात होती है, इसलिए आइए आज इसी के बारे में जानते हैं।
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थकान - फोटो : Freepik
Chronic Fatigue Syndrome:  आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां हर कोई अपने काम में व्यस्त है, लगातार थकान और चीजें भूलने की आदत को अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हम सोचते हैं कि यह बस काम का दबाव या आराम की कमी है, लेकिन अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो यह एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का संकेत हो सकता है जिसे क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (CFS) कहते हैं।

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम एक जटिल और दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को अत्यधिक गंभीर थकान महसूस होती है जो आराम करने पर भी दूर नहीं होती। इसके साथ ही, स्मृति हानि (भूलने की समस्या), एकाग्रता में कमी, और शारीरिक-मानसिक कमजोरी जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। हमारे देश में इस सिंड्रोम के बारे में जागरूकता बहुत कम है, जिसके कारण अक्सर लोग इसे अनदेखा कर देते हैं और सही इलाज से वंचित रह जाते हैं। इसलिए आइए इस लेख में क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के बारे में विस्तार से समझते हैं। 
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थकान - फोटो : Freepik
लक्षण
क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का प्रमुख लक्षण है बिना कारण गंभीर थकान, जो छह महीने या उससे अधिक समय तक रहती है और आराम से ठीक नहीं होती। अन्य लक्षणों में चीजें भूलना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, और नींद की गड़बड़ी शामिल हैं। पोस्ट-एक्सर्शनल मलैज (PEM) इसका खास लक्षण है, जिसमें हल्की गतिविधि के बाद भी लंबे समय तक थकान रहती है।

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थकान - फोटो : Freepik
संभावित कारण
क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम होने के पीछे के सबसे आम कारण तनाव, अनियमित नींद, और असंतुलित आहार जैसी खराब जीवनशैली की आदतें हैं। इसके अतिरिक्त, हार्मोनल असंतुलन, विशेष रूप से तनाव हार्मोन या थायरॉइड की गड़बड़ी, और इम्यून सिस्टम की कमजोरी भी इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकती हैं और इसे अधिक गंभीर बना सकती हैं।

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थकान - फोटो : Freepik
निदान और उपचार
क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का निदान चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसे पहचानने के लिए कोई विशिष्ट टेस्ट मौजूद नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर मरीज़ के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ही इसका निदान करते हैं।
 
इसके उपचार में मुख्य रूप से लक्षणों का प्रबंधन शामिल है। इसमें नियमित नींद, संतुलित आहार, और हल्के व्यायाम जैसी जीवनशैली में बदलाव शामिल होते हैं। इसके साथ ही, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और ग्रेडेड एक्सरसाइज थेरेपी (GET) भी इस स्थिति में काफी प्रभावी मानी जाती हैं। मेडिटेशन और प्राणायाम जैसी पद्धतियाँ तनाव को कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होती हैं, जो क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
 
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थकान - फोटो : Freepik
बचाव और निष्कर्ष
क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम से बचने के लिए 7-8 घंटे की नींद, हेल्दी डाइट, और तनाव प्रबंधन जरूरी है। रोजाना योग, ध्यान, करें समय बिताएं और स्क्रिन टाइम को सीमित रखें। पर्याप्त पानी पिएं और प्रोसेस्ड फूड से बचें। अगर थकान और भूलने की समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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