मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बावजूद, आज भी 'डिप्रेशन' को लेकर कुछ लोगों के मन में कई तरह के भ्रम मौजूद हैं। अक्सर लोग थकान, उदासी या एकाग्रता में कमी को सीधे तौर पर डिप्रेशन मान लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार कई शारीरिक बीमारियां ऐसी हैं जिनके लक्षण डिप्रेशन जैसे दिखाई देते हैं। इसे 'मिमिक्री ऑफ डिप्रेशन' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, थायराइड की गड़बड़ी या शरीर में विटामिन की भारी कमी आपके मूड को इस कदर प्रभावित कर सकती है कि लोग खुद को मानसिक रूप से बीमार समझने लगते हैं।
इन बीमारियों और डिप्रेशन के बीच बहुत ही बारीक अंतर होता है, जिसे सामान्यतौर पर चिकित्सा परीक्षण से ही पहचाना जा सकता है। अगर मूल बीमारी शारीरिक है और आप डिप्रेशन का इलाज कर रहे हैं, तो समस्या कभी पूरी तरह ठीक नहीं होगी। इसलिए, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह समझना जरूरी है कि शरीर के अंदर चल रही उथल-पुथल आपके मस्तिष्क के रसायनों को कैसे प्रभावित कर रही है। इन डिप्रेशन जैसी लक्षणों वाली बीमारियों की पहचान करना ही सही उपचार की पहली सीढ़ी होती है जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।