फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Tips: डिप्रेशन से मिलते जुलते होते हैं इन बीमारियों के भी लक्षण, जान लें इनके बीच के बारीक अंतर

Thu, 12 Feb 2026 05:30 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Diseases With Symptoms Like Depression: अक्सर कुछ लोगों को जब उदासी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं तो वे उसे डिप्रेशन का लक्षण मान लेते हैं। मगर ये जरूरी है कि उदासी या कोई भी काम करने का मन नहीं करना सिर्फ डिप्रेशन का संकेत हो। इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
विज्ञापन
1 of 5
स्ट्रेस - फोटो : Adobe Stock
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बावजूद, आज भी 'डिप्रेशन' को लेकर कुछ लोगों के मन में कई तरह के भ्रम मौजूद हैं। अक्सर लोग थकान, उदासी या एकाग्रता में कमी को सीधे तौर पर डिप्रेशन मान लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार कई शारीरिक बीमारियां ऐसी हैं जिनके लक्षण डिप्रेशन जैसे दिखाई देते हैं। इसे 'मिमिक्री ऑफ डिप्रेशन' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, थायराइड की गड़बड़ी या शरीर में विटामिन की भारी कमी आपके मूड को इस कदर प्रभावित कर सकती है कि लोग खुद को मानसिक रूप से बीमार समझने लगते हैं। 

इन बीमारियों और डिप्रेशन के बीच बहुत ही बारीक अंतर होता है, जिसे सामान्यतौर पर चिकित्सा परीक्षण से ही पहचाना जा सकता है। अगर मूल बीमारी शारीरिक है और आप डिप्रेशन का इलाज कर रहे हैं, तो समस्या कभी पूरी तरह ठीक नहीं होगी। इसलिए, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह समझना जरूरी है कि शरीर के अंदर चल रही उथल-पुथल आपके मस्तिष्क के रसायनों को कैसे प्रभावित कर रही है। इन डिप्रेशन जैसी लक्षणों वाली बीमारियों की पहचान करना ही सही उपचार की पहली सीढ़ी होती है जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
विज्ञापन

2 of 5
थायरॉइ़ड - फोटो : Adobe Stock
थायराइड विकार और मानसिक स्थिति
हाइपोथायरायडिज्म में जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसके कारण व्यक्ति को अत्यधिक थकान, सुस्ती और उदासी महसूस होती है, जो बिल्कुल डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों जैसे होते हैं। अगर आप बिना किसी ठोस कारण के उदास महसूस कर रहे हैं, तो मनोचिकित्सक से मिलने से पहले एक बार 'टी-एस-एच' टेस्ट जरूर करवाएं, क्योंकि हार्मोनल असंतुलन आपके मूड का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
विटामिन डी - फोटो : Adobe Stock
विटामिन-D और B12 की भारी कमी
शरीर में विटामिन-D और B12 की कमी सीधे तौर पर 'सेरोटोनिन' जैसे हैप्पी हार्मोन्स के उत्पादन को प्रभावित करती है। विटामिन B12 की कमी से नसों में कमजोरी और याददाश्त में धुंधलापन आता है, जिसे लोग अक्सर 'डिप्रेसिव फॉग' समझ लेते हैं। वहीं, 'सनशाइन विटामिन' यानी विटामिन-D की कमी से हड्डियों में दर्द के साथ-साथ गंभीर चिड़चिड़ापन पैदा होता है। इन विटामिनों के लेवल को ठीक करते ही मानसिक स्थिति में बड़ा सुधार देखा जा सकता है।

4 of 5
थकान - फोटो : Freepik
एनीमिया और क्रोनिक फटीग सिंड्रोम
जब शरीर में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, तो मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। जिसकी वजह से व्यक्ति हर समय निरुत्साहित और थका हुआ महसूस करता है। इसी तरह क्रोनिक फटीग सिंड्रोम में व्यक्ति को बिस्तर से उठने तक की ऊर्जा महसूस नहीं होती। ये शारीरिक स्थितियां व्यक्ति को सामाजिक रूप से कटने पर मजबूर कर देती हैं, जिसे अक्सर क्लीनिकल डिप्रेशन का नाम दे दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
अवसाद के शुरुआती संकेत - फोटो : Adobe Stock
सही पहचान ही है बचाव का रास्ता
डिप्रेशन और इन शारीरिक बीमारियों के बीच अंतर करने के लिए 'लिपिड प्रोफाइल' और 'ब्लड काउंट' जैसे बेसिक टेस्ट करवाना जरूरी हैं। अगर एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं के बावजूद सुधार नहीं हो रहा है, तो समस्या शारीरिक हो सकती है। अपनी जीवनशैली में सुधार करें, धूप लें और पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। ध्यान रखें हर मानसिक उलझन का कारण केवल दिमाग नहीं होता, कभी-कभी शरीर की छोटी सी कमी भी बड़े मानसिक बदलाव ला सकती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें