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Office Posture: ऑफिस में गलत पोस्चर में बैठने से शरीर में बढ़ जाता है इन तीन बीमारियों का खतरा

Mon, 21 Jul 2025 05:47 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Office Posture Diseases: अक्सर कुछ लोग ऑफिस में गलत पोस्चर में बैठते हैं। देखा जाए तो ये बहुत आम गलती है, जो लगभग सभी लोग करते हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि ऑफिस में गलत पोस्चर में बैठने से शरीर में कौन-कौन सी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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खराब पॉश्चर - फोटो : Adobe Stock
Office Posture Diseases: आज के डिजिटल दौर में ऑफिस में घंटों तक कुर्सी पर बैठे रहना हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। इस दौरान हममें से ज्यादातर लोग अक्सर गलत तरीके से बैठते हैं, कभी कमर झुकाकर, तो कभी कंधे आगे करके या गर्दन को स्क्रीन की ओर झुकाकर। शुरुआत में यह बस थोड़ा-बहुत पीठ दर्द या गर्दन में अकड़न जैसा लग सकता है।

लेकिन, अगर हम इस खराब पोस्चर को नजरअंदाज करते रहें, तो यह सिर्फ दर्द तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ऐसे बैठने से हमारा शरीर कई गंभीर बीमारियों के घेरे में आ सकता है, जिनके बारे में शायद आपने सोचा भी न हो। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि ऑफिस में गलत पोस्चर में बैठने से कौन-सी तीन बड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और कैसे आप खुद को इनसे बचा सकते हैं।
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खराब पॉश्चर - फोटो : Adobe Stock
पीठ और गर्दन का दर्द
गलत पोस्चर में लगातार बैठने से आपकी रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। जब आप झुककर या कंधे झुकाकर बैठते हैं, तो रीढ़ की डिस्क और आसपास की मांसपेशियों पर असामान्य खिंचाव पड़ता है। यह धीरे-धीरे मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट्स पर तनाव और डिस्क के घिसाव का कारण बनता है।

इसका सीधा परिणाम लगातार पीठ दर्द होता है, जो कमर से लेकर गर्दन और कंधों तक फैल सकता है। यह दर्द इतना बढ़ सकता है कि रोजमर्रा का सामान्य काम करना भी मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में, यह साइटिका जैसी नसों से जुड़ी समस्याओं का भी कारण बन सकता है, जहां दर्द पैर तक फैल जाता है।

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पाचन तंत्र - फोटो : Freepik.com
खराब पाचन और मेटाबॉलिक समस्याएं
गलत पोस्चर सिर्फ रीढ़ की हड्डी को ही नहीं, बल्कि आपके आंतरिक अंगों को भी प्रभावित करते हैं। जब आप कमर झुकाकर या आगे की ओर झुककर बैठते हैं, तो पेट और आंतों जैसे महत्वपूर्ण पाचन अंगों पर दबाव पड़ता है। यह दबाव पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे एसिड रिफ्लक्स, अपच, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसके अलावा, गलत पोस्चर के साथ लंबे समय तक बैठे रहने से शारीरिक गतिविधि कम होती है, जो आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है। धीमा मेटाबॉलिज्म वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और अंततः टाइप 2 डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।

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खराब पॉश्चर - फोटो : Adobe Stock
हृदय रोग का जोखिम बढ़ता है
यह सुनकर शायद आपको आश्चर्य लगे, लेकिन गलत पोस्चर और अत्यधिक देर तक बैठे रहना आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है।

इससे वैरिकोज वेंस और डीप वेन थ्रोम्बोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें पैरों की नसों में खून के थक्के बन सकते हैं। इससे भी बढ़कर, गलत पोस्चर के साथ जुड़ा गतिहीन जीवनशैली हाई ब्लड प्रेशर, हाई कॉलेस्ट्रॉल और मोटापे को बढ़ावा देती है, ये सभी हृदय रोग और स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
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खराब पॉश्चर - फोटो : Adobe Stock
क्या करें?
ऑफिस में गलत पोस्चर में बैठने के गंभीर परिणामों को देखते हुए, यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी आदतों पर ध्यान दें। अच्छी बात यह है कि इन सभी खतरों से बचा जा सकता है। इसके लिए, सही एर्गोनोमिक सेटअप अपनाएं, अपनी कुर्सी, मॉनिटर और कीबोर्ड को ऐसे सेट करें कि आपकी पीठ सीधी रहे और आंखें स्क्रीन के लेवल पर हों। हर 30-60 मिनट में नियमित ब्रेक लें, खड़े हों, थोड़ा टहलें और स्ट्रेचिंग करें। 

बैठते समय सचेत होकर अपनी मुद्रा को सही रखें; पीठ सीधी, कंधे ढीले और पैर फर्श पर सपाट हों। अपनी कोर मसल्स को मजबूत करने के लिए नियमित व्यायाम करें, क्योंकि ये सही पोस्चर बनाए रखने में मदद करती हैं। यदि आपको लगातार दर्द या उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो तुरंत डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें। याद रखें, अपनी मुद्रा को ठीक करना आपके दीर्घकालिक स्वास्थ्य में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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